निशु आजाद के पिता संजय कुमार से कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार को उसे दिल्ली में अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों, घटनाक्रम और सामने आए दावों की जांच कर रही है।
बुलंदशहर से पकड़ा गया था स्वतंत्र भारद्वाज
पुलिस के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पकड़ा गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस को उसके बुलंदशहर में होने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद टीम ने वहां पहुंचकर कार्रवाई की। गिरफ्तारी से पहले उसके कथित तौर पर वहां से निकलने की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने तलाश तेज की और उसे हिरासत में ले लिया।
इसके बाद उसे दिल्ली लाया गया और शनिवार को कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित जज के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने पुलिस की मांग पर उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अब पुलिस उससे मामले को लेकर पूछताछ करेगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 23 जून 2026 को प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम सामने आए थे।
शुरुआत में मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कुछ धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। बाद में मामले को लेकर उठे सवालों और शिकायतों के बीच पुलिस ने एफआईआर में SC/ST एक्ट से जुड़ी धाराएं भी जोड़ीं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।
वायरल पॉडकास्ट के बाद बढ़ा विवाद
मामला उस समय दोबारा सुर्खियों में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस वीडियो में उसने जंतर-मंतर की घटना और संजय कुमार के साथ हुई कथित मारपीट का जिक्र किया था। वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी।
हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने बाद में अपने बचाव में सेल्फ-डिफेंस का दावा किया था। ऐसे में घटना में वास्तव में क्या हुआ और आरोपों की सच्चाई क्या है, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
72 घंटे में गिरफ्तारी का दिया गया था भरोसा
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन से जुड़े लोग और समर्थक पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद 72 घंटे के भीतर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने बुलंदशहर में कार्रवाई करते हुए भारद्वाज को पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद अब अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। इस दौरान पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों और बयानों की जांच के साथ आरोपी से पूछताछ करेगी।
POCSO के तहत भी अलग FIR
इस मामले से जुड़े घटनाक्रम के बीच एक नाबालिग की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत एक अलग एफआईआर दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। इसमें ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। इसके अलावा मूल मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इन सभी आरोपों पर पुलिस जांच कर रही है। किसी भी आरोप को अदालत के अंतिम फैसले से पहले दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
अब पुलिस के सामने क्या चुनौती?
एक दिन की पुलिस कस्टडी के दौरान जांच एजेंसियां घटनाक्रम से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों, एफआईआर में दर्ज आरोपों, वायरल वीडियो और संबंधित लोगों के बयानों को खंगाल सकती हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और मामले में लगाए गए विभिन्न आरोपों का आपस में क्या संबंध है।
फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कोर्ट की ओर से एक दिन की पुलिस कस्टडी दिए जाने के बाद अब जांच की दिशा और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर है।








