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August 25, 2026 2:50 pm

ममता बनर्जी का शुभेंदु पर गंभीर आरोप! ‘घर में नजरबंद’ करने की धमकी का दावा, बंगाल की सियासत में घमासान

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। सोमवार, 24 अगस्त 2026 को ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोकने की धमकी दी। ममता ने इस बयान को लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए राष्ट्रपति तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की अपील की।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत ममता बनर्जी के एक फेसबुक लाइव से हुई। इसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को महिलाओं को मिलने वाली अन्नपूर्णा योजना की ₹3,000 मासिक सहायता में देरी को लेकर निशाना बनाया। ममता ने कहा कि वह लोगों के मुद्दे उठाने के लिए सड़क पर उतरती रहेंगी और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगी।

इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने ममता पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं है और वह यह सुनिश्चित करेंगे कि ममता घर से बाहर न निकलें। इसी बयान को आधार बनाकर ममता ने शुभेंदु पर गंभीर आरोप लगाए।

ममता ने क्या आरोप लगाया?

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर शुभेंदु अधिकारी के बयान का वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि किसी निर्वाचित मुख्यमंत्री को यह अधिकार कैसे हो सकता है कि वह किसी राजनीतिक नेता की आवाजाही पर रोक लगाने की बात करे।

उन्होंने इसे भारतीय राजनीति का “खतरनाक” और “निचला” दौर बताते हुए राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश से मामले पर ध्यान देने की अपील की। ममता ने सवाल किया कि क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है।

‘घर में नजरबंद’ करने की धमकी का दावा

ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी के कथित बयान को घर में नजरबंदी, डराने-धमकाने और राजनीतिक उत्पीड़न की आशंका से जोड़ दिया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, शुभेंदु के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद जरूर बढ़ा है, लेकिन ममता को वास्तव में घर में नजरबंद किए जाने की कोई पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसलिए फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है।

शुभेंदु ने क्यों दिया बयान?

रिपोर्टों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी का बयान ममता बनर्जी की उन टिप्पणियों के बाद आया, जिनमें उन्होंने सरकार पर महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में देरी को लेकर सवाल उठाए थे।

ममता ने कहा था कि वह लोगों के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगी। इसके जवाब में शुभेंदु ने उन्हें सड़क पर न उतरने की सलाह दी और कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सड़क पर आने की जरूरत न पड़े। इस बयान ने दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी।

राष्ट्रपति और CJI से ममता की अपील

ममता बनर्जी ने इस पूरे विवाद को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की अपील करते हुए इसे संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा बताया।

उनका सवाल था कि किसी राजनीतिक दल की प्रमुख और विपक्ष की प्रमुख नेता की आवाजाही की स्वतंत्रता को लेकर इस तरह की टिप्पणी कैसे की जा सकती है। ममता ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक नेताओं को जनता के बीच जाने और अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

TMC ने भी जताया विरोध

ममता के आरोप के बाद TMC नेताओं ने शुभेंदु अधिकारी के बयान की आलोचना शुरू कर दी। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव और विपक्ष की आवाज को रोकने की कोशिश के रूप में पेश किया।

TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि ममता बनर्जी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगी और राज्यभर में लोगों के बीच जाएंगी।

बंगाल की राजनीति में क्यों अहम है यह विवाद?

ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे हैं। दोनों के बीच लंबे समय से तीखा राजनीतिक संघर्ष रहा है। ऐसे में सार्वजनिक मंच से एक-दूसरे पर होने वाले हमले राज्य की सियासत में तुरंत बड़ा मुद्दा बन जाते हैं।

ताजा विवाद भी ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से गर्म है। ममता बनर्जी जहां विपक्ष की भूमिका में सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं, वहीं शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार TMC के आरोपों का जवाब दे रही है।

ममता का राजनीतिक तेवर बरकरार

विवाद के बीच ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि वह राजनीति से संन्यास लेने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने BJP के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखने की बात कही।

इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में TMC और BJP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। खासकर सरकार की योजनाओं, विपक्ष के आंदोलनों और नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने रह सकते हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल पूरा विवाद शुभेंदु अधिकारी के कथित बयान और उस पर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया के इर्द-गिर्द है। ममता ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल बताया है, जबकि शुभेंदु की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ममता को वास्तव में नजरबंद किए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। मामला फिलहाल आरोप, बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया तक सीमित है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना है।

कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के ‘घर में नजरबंद’ करने की धमकी के दावे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति और CJI से हस्तक्षेप की अपील के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर संवैधानिक अधिकारों की बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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