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August 23, 2026 4:57 pm

आत्मनिर्भर डिफेंस की ओर बड़ा कदम! GRSE और यंत्र इंडिया की 5 परियोजनाओं का शिलान्यास, बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

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कोलकाता: भारत के रक्षा उत्पादन और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में रविवार को बड़ा कदम उठाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलकाता से गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और यंत्र इंडिया लिमिटेड की पांच ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजनाओं का वर्चुअल शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं पर करीब 3,500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। पांच में से तीन परियोजनाएं GRSE और दो परियोजनाएं यंत्र इंडिया से जुड़ी हैं।

रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस

इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश में रक्षा उपकरणों और युद्धपोतों के निर्माण की क्षमता को बढ़ाना है। सरकार लगातार घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है। नई सुविधाओं के विस्तार से उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ रक्षा क्षेत्र से जुड़े औद्योगिक इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक वैश्विक जहाज निर्माण क्षेत्र में पैदा हो रहे अवसरों का भारत फायदा उठा सकता है।

GRSE की तीन परियोजनाओं से शिपबिल्डिंग को मिलेगा विस्तार

GRSE अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए हुगली नदी के दोनों किनारों पर दो छोटे शिपयार्ड विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा रायचक में करीब 32 एकड़ की नदी किनारे वाली जमीन का इस्तेमाल भी विस्तार के लिए किया जाएगा। इन सुविधाओं का मकसद युद्धपोत निर्माण और जहाजों की रिफिटिंग क्षमता को मजबूत करना है।

GRSE देश की प्रमुख रक्षा जहाज निर्माण कंपनियों में शामिल है। नई परियोजनाओं से कंपनी को बड़े और जटिल जहाजों के निर्माण के लिए अतिरिक्त क्षमता हासिल करने में मदद मिल सकती है। इससे भारतीय नौसेना की भविष्य की जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने की क्षमता भी मजबूत होने की उम्मीद है।

यंत्र इंडिया की दो परियोजनाएं भी अहम

पांच परियोजनाओं में से दो यंत्र इंडिया लिमिटेड से संबंधित हैं। कंपनी की विस्तार योजनाओं का उद्देश्य रक्षा उत्पादन के लिए जरूरी धातु और फोर्जिंग क्षमता को मजबूत करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित मेटल एंड स्टील फैक्ट्री में नई उत्पादन सुविधाओं पर निवेश कर रही है।

इन सुविधाओं से रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण धातु उत्पाद और अन्य रणनीतिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे सप्लाई चेन को मजबूत करने और महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

रोजगार और MSME सेक्टर को भी फायदा

इन परियोजनाओं का असर केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। GRSE के अधिकारियों के मुताबिक, विस्तार परियोजनाओं से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र को भी फायदा मिलेगा। विशेष रूप से MSME और ancillary industries के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।

रक्षा उत्पादन की बड़ी परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर सप्लायर, इंजीनियरिंग कंपनियों, तकनीकी सेवाओं और अन्य औद्योगिक इकाइयों की मांग बढ़ सकती है। इससे पश्चिम बंगाल के औद्योगिक इकोसिस्टम को भी गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।

‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। इसका लक्ष्य केवल हथियार और सैन्य उपकरण देश में बनाना ही नहीं, बल्कि डिजाइन, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के स्तर पर भी घरेलू क्षमता विकसित करना है।

राजनाथ सिंह द्वारा इन पांच परियोजनाओं का शिलान्यास इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे रक्षा क्षेत्र में सरकारी कंपनियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ निजी उद्योग और छोटे-बड़े सप्लायरों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं।

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास पर भी जोर

कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल में नए औद्योगिक निवेश और परियोजनाओं को विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में फैक्ट्रियों के बंद होने और लॉकआउट की खबरों की जगह अब नई परियोजनाओं की शुरुआत की खबरें आ रही हैं।

करीब 3,500 करोड़ रुपये की पांच रक्षा परियोजनाएं ऐसे समय में शुरू की जा रही हैं, जब केंद्र सरकार देश के रक्षा उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इनके पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल में रक्षा विनिर्माण और जहाज निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।

भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की तैयारी

राजनाथ सिंह ने भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता को वैश्विक स्तर तक ले जाने की संभावना पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र में मौजूदा अवसरों का लाभ उठाकर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

GRSE की नई सुविधाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। युद्धपोत निर्माण और रिफिटिंग की क्षमता बढ़ने से भारतीय रक्षा उद्योग को घरेलू मांग के साथ-साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय अवसरों का फायदा उठाने में भी मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, GRSE और यंत्र इंडिया की पांच परियोजनाओं का शिलान्यास भारत के रक्षा विनिर्माण ढांचे के विस्तार की दिशा में अहम कदम है। करीब ₹3,500 करोड़ के निवेश वाली इन परियोजनाओं से उत्पादन क्षमता, रोजगार, MSME अवसर और स्वदेशी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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