तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय को नए परिसर में शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना से जुड़े करीब ₹5.54 करोड़ के टेंडर को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। DMK और BJP नेताओं ने कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
विवाद की शुरुआत उस प्रस्ताव से हुई, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय को नए स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई थी। विपक्ष का आरोप है कि जिस प्रक्रिया के तहत काम आगे बढ़ाया गया, उसमें टेंडर जारी होने और निर्माण गतिविधियों के बीच सवाल खड़े करने वाली परिस्थितियां नजर आईं। विपक्षी नेताओं ने इसे पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम हो गया है क्योंकि मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने तमिलनाडु को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया था और प्रशासन को इस दिशा में मिशन मोड में काम करने की बात कही थी।
वहीं, विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री विजय ने विपक्ष, खासकर DMK, पर पलटवार करते हुए चेतावनी दी कि उन्हें मजबूर न किया जाए कि वे कथित सबूत सामने रखें। उनके इस बयान के बाद विधानसभा की सियासत और गरमा गई है।
हालांकि, ₹5.54 करोड़ के टेंडर को लेकर लगाए गए आरोप अभी राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र जांच या सक्षम एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार साबित किए जाने के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। सरकार की ओर से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का बचाव किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विवाद पर सरकार की सफाई और विपक्ष के जवाब के साथ मामला और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रशासन पर लगे इन आरोपों का स्पष्ट जवाब देने और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को शांत करने की है। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की कथित पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी दावों से जोड़कर राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रहा है।








