बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। 25 जुलाई को NEET-UG से जुड़े मुद्दों पर बिहार बंद के दौरान हुए प्रदर्शन में एक पुलिसकर्मी का फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आया था। इसके बाद घटना को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद तेज हो गया। मामले में राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई।
भीड़ में घिर गया था जवान
घटना को लेकर बिहार प्रशासन की ओर से बताया गया कि संबंधित पुलिसकर्मी एक अलग मामले की जांच के लिए जा रही जिला इंटेलिजेंस यूनिट की टीम का हिस्सा था। वह सीवान के जेपी चौक के पास प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंस गया। जिला प्रशासन के मुताबिक, इसी स्थिति के दौरान उसने हवा में फायरिंग की। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे फायरिंग करने का आदेश नहीं दिया गया था।
बिहार पुलिस के अनुसार, पुलिसकर्मी ने चार राउंड हवा में फायर किए। पुलिस का दावा है कि फायरिंग का उद्देश्य अपनी जान, सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी संपत्ति की रक्षा करना था। वहीं, पुलिस ने कहा कि जिस स्थान पर फायरिंग हुई, वहां इन गोलियों से किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं मिली।
पुलिसकर्मी सस्पेंड, विभागीय जांच शुरू
वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। प्रशासन ने यह भी माना कि प्रदर्शन जैसी स्थिति में इस तरह के हथियार के साथ भीड़ के बीच जाना उचित नहीं था। अब जांच में यह देखा जा रहा है कि घटनाक्रम के दौरान पुलिसकर्मी ने किन परिस्थितियों में हथियार का इस्तेमाल किया और क्या निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ था।
घायलों को लेकर भी सामने आया पुलिस का पक्ष
बिहार पुलिस ने कहा कि फायरिंग वाली जगह से अलग-अलग स्थानों पर तीन लोग घायल मिले थे। पुलिस के अनुसार, ये स्थान फायरिंग की जगह से करीब 1.5 से 2 किलोमीटर दूर थे और तीनों घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई गई। इन घटनाओं की अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
इस बिंदु को लेकर भी विवाद बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि फायरिंग की परिस्थितियों और घायलों के बीच संबंध की जांच की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?
सीवान की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती और बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सीवान में पुलिस द्वारा AK-47 के इस्तेमाल का मुद्दा भी रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की गंभीरता पर ध्यान दिया और मामले को व्यापक संदर्भ में देखा।
यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब बिहार के कई हिस्सों में NEET-UG से जुड़े छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। सीवान के अलावा पटना, सितामढ़ी, सारण और अन्य इलाकों में भी प्रदर्शन हुए। पुलिस के अनुसार, कई स्थानों पर पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए। वहीं, सरकार और प्रशासन की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था और जिस पुलिसकर्मी ने निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ कार्रवाई की, उसके खिलाफ विभागीय कदम उठाया गया है।
फिलहाल सीवान फायरिंग मामले में जांच जारी है। AK-47 से फायरिंग की घटना सामने आने, जवान के भीड़ में फंसने और बिना आदेश फायरिंग किए जाने की बात प्रशासन की ओर से बताई गई है, जबकि फायरिंग से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब इस घटना की जांच और पुलिस कार्रवाई पर होने वाली आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है।








