भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता का असर घरेलू बाजार की धारणा पर पड़ा। Brent क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बीच निवेशकों में चिंता बढ़ी और Nifty 50 फिसलकर 24,200 के आसपास पहुंच गया।
बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। निवेशक इसी आशंका को देखते हुए तेल, महंगाई और कंपनियों की लागत से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।
Brent क्रूड $91 के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच आई है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और कई उद्योगों के उत्पादन खर्च पर पड़ सकता है।
भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए महंगा क्रूड खास तौर पर महत्वपूर्ण है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर में होने वाला भुगतान बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर भी दबाव की आशंका रहती है।
Nifty 24,200 के करीब
तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच Nifty 50 में गिरावट बढ़ी और इंडेक्स 24,200 के करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली की, जिससे बाजार की बढ़त कमजोर पड़ गई।
Sensex में भी दबाव देखने को मिला। बैंकिंग, वित्तीय और कुछ अन्य प्रमुख सेक्टर के शेयरों में बिकवाली ने बाजार की दिशा पर असर डाला। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर
शेयर बाजार में आगे की दिशा तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की भूमिका अहम रहने वाली है। अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में आगे होने वाला उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। अगर क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर इसके संभावित असर को लेकर बाजार में चिंता बनी रह सकती है।
किन सेक्टर पर पड़ सकता है असर?
महंगे कच्चे तेल का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग तरीके से पड़ता है। एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और पेंट जैसे उद्योगों की लागत पर इसका सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, तेल और गैस से जुड़ी कुछ कंपनियों को ऊंची कीमतों से फायदा भी हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला लेने के बजाय व्यापक आर्थिक संकेतकों और कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल Brent क्रूड का $91 के पार जाना और Nifty का 24,200 के करीब फिसलना शेयर बाजार के लिए अहम संकेत है। आने वाले कारोबार में तेल की कीमत, वैश्विक बाजारों की दिशा और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि भारतीय बाजार में गिरावट आगे बढ़ती है या निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिलती है।








