पेरिरा। कोलंबिया में आए विनाशकारी भूकंप के बीच एक महिला की कहानी ने पूरे देश को उम्मीद और फिर गहरे दुख से भर दिया। 32 वर्षीय डेनिएला लार्गो को पेरिरा में एक ढही हुई इमारत के मलबे से करीब 36-37 घंटे बाद जिंदा बाहर निकाला गया था, लेकिन रेस्क्यू के कुछ दिन बाद चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। उनके बचाव के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने राहत और खुशी जाहिर की थी और वह इस त्रासदी के बीच उम्मीद की प्रतीक बन गई थीं।
करीब 37 घंटे बाद मिली जिंदगी की उम्मीद
10 अगस्त को आए 7.4 तीव्रता के भूकंप ने पश्चिमी कोलंबिया के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। पेरिरा भी प्रभावित शहरों में शामिल था। भूकंप के बाद राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे थे।
डेनिएला को मलबे के नीचे खोजने के बाद रेस्क्यू टीम ने करीब 10 घंटे तक अभियान चलाया। उनका एक हाथ मलबे और एक धातु के दरवाजे के बीच फंसा हुआ था। आखिरकार बचावकर्मियों ने रास्ता बनाकर उन्हें बाहर निकाला। उस समय आसपास मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर राहत की खुशी जताई।
बेटे के जन्मदिन से जुड़ी थी मार्मिक कहानी
डेनिएला की कहानी इसलिए भी बेहद भावुक कर देने वाली थी क्योंकि जिस दिन भूकंप आया, उसी दिन उनके 12 वर्षीय बेटे का जन्मदिन था। परिवार को डेनिएला के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद उनकी तलाश शुरू हुई।
बचाव के बाद कुछ समय के लिए परिवार और पूरे देश को उम्मीद जगी कि इस भयानक आपदा के बीच एक जिंदगी बच गई है। उनके पिता ने भी बेटी के बच जाने को एक नई जिंदगी मिलने जैसा बताया था।
रेस्क्यू के बाद भी हालत बनी रही गंभीर
मलबे से बाहर निकालने के बाद डेनिएला की हालत गंभीर थी। उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई और अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक रेस्क्यू के दौरान और उसके बाद उन्हें गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
बाद में उनकी हालत बिगड़ती गई और 14 अगस्त को उनकी मौत हो गई। परिवार ने उनकी मौत की पुष्टि की।
भूकंप ने मचाई व्यापक तबाही
कोलंबिया में आए इस भूकंप ने कई शहरों और इलाकों को प्रभावित किया। पेरिरा और काली समेत कई स्थानों पर इमारतों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण राहत और बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना रहा।
15 अगस्त तक सामने आए आंकड़ों में करीब 295 लोगों की मौत, लगभग 3,935 लोगों के घायल होने और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। बड़ी संख्या में परिवारों को विस्थापित होना पड़ा और कई स्थानों पर राहत अभियान जारी रहा।
उम्मीद की कहानी बनी, लेकिन अंत बेहद दुखद रहा
डेनिएला को मलबे से जिंदा निकालना उस समय राहत अभियान की सबसे भावुक घटनाओं में से एक था। इतने लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने के बाद उनका जीवित मिलना बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया था।
लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी मौत ने इस उम्मीद को दुख में बदल दिया। डेनिएला अपने पीछे 12 साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उनकी कहानी अब कोलंबिया में इस विनाशकारी भूकंप की सबसे मार्मिक घटनाओं में गिनी जा रही है।
भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारी प्रभावित इलाकों में मलबा हटाने, लोगों को सहायता पहुंचाने तथा लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।








