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August 8, 2026 6:37 pm

भाई की डांट से घर छोड़ा, नौकरी का झांसा देकर तस्करों ने फंसाया; 85 दिन बाद 12वीं की छात्रा रेस्क्यू

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बिहार के मुजफ्फरपुर से मानव तस्करी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के घर से लापता होने के बाद करीब 85 दिनों तक उसके परिवार को उसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई के बाद छात्रा को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, छात्रा घर से नाराज होकर निकली थी और बाद में उसे नौकरी का झांसा देकर तस्करी के नेटवर्क में फंसाए जाने का आरोप है।

इस मामले ने एक बार फिर किशोर-किशोरियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का लालच देकर अपने जाल में फंसाने वाले मानव तस्करी गिरोहों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

घर से नाराज होकर निकली थी छात्रा

बताया जा रहा है कि छात्रा अपने भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कुछ समय बाद वापस लौट आएगी, लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।

परिवार ने उसकी तलाश शुरू की और मामले की जानकारी पुलिस को दी। छात्रा के अचानक गायब होने के बाद पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की और उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई।

नौकरी का दिया गया झांसा

जांच के दौरान सामने आया कि घर से निकलने के बाद छात्रा को नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया। इसी बहाने उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया। आरोप है कि इसी दौरान वह मानव तस्करी से जुड़े लोगों के संपर्क में आ गई।

परिवार के मुताबिक, छात्रा के अचानक गायब होने के बाद उन्हें लंबे समय तक यह पता नहीं चल सका कि वह कहां है। करीब 85 दिनों तक परिवार उसकी वापसी और सुरक्षित मिलने का इंतजार करता रहा।

85 दिनों बाद सुरक्षित बरामदगी

लगातार जांच और तलाश के बाद छात्रा को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। उसे पुलिस की निगरानी में परिवार के संपर्क में लाया गया। इस कार्रवाई के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।

रेस्क्यू के बाद पुलिस मामले की पूरी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्रा को किस तरह नौकरी का लालच दिया गया, उसे किन लोगों ने अपने संपर्क में लिया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

मानव तस्करी के नेटवर्क की जांच

मामले में मानव तस्करी के एंगल से जांच की जा रही है। पुलिस उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिन पर छात्रा को बहला-फुसलाकर दूसरे स्थान पर ले जाने या उसे इस नेटवर्क से जोड़ने का संदेह है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हैं और क्या पहले भी इसी तरह किसी अन्य युवक या युवती को नौकरी का लालच देकर फंसाया गया था।

परिवार के लिए 85 दिन रहे बेहद मुश्किल

छात्रा के लापता होने के बाद उसके परिवार के लिए करीब तीन महीने का समय बेहद मुश्किल रहा। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती गई। परिवार लगातार उसकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद करता रहा।

अब छात्रा के मिलने के बाद परिवार को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, घटना के कारण उसके सामने आई परिस्थितियों को देखते हुए आगे उसे परिवार और संबंधित अधिकारियों की मदद और देखभाल की जरूरत हो सकती है।

नौकरी के नाम पर ठगी और तस्करी से रहें सावधान

यह मामला लोगों को नौकरी के नाम पर दिए जाने वाले झूठे ऑफर को लेकर भी सावधान करता है। खासकर कम उम्र के बच्चों और किशोरों को अनजान लोगों के झांसे में आने से बचाने के लिए परिवारों को सतर्क रहने की जरूरत है।

किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा नौकरी, यात्रा या कम समय में ज्यादा कमाई का प्रस्ताव दिए जाने पर उसकी पूरी जानकारी की जांच करना जरूरी है। नाबालिग के घर से अचानक चले जाने या संपर्क टूटने की स्थिति में परिवार को तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

फिलहाल छात्रा सुरक्षित है और मामले की जांच जारी है। पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर नौकरी का झांसा देकर छात्रा को अपने जाल में फंसाया था। 85 दिनों बाद हुई इस बरामदगी ने परिवार को राहत जरूर दी है, लेकिन जांच के जरिए इस पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आना अभी बाकी है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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