दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन से घायल हुए एक याचिकाकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया कि घायल युवक के शरीर से कई धातु (मेटल) के कण निकाले गए हैं। इस मेडिकल रिपोर्ट को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए गए प्रोजेक्टाइल सामान्य रबर या प्लास्टिक के नहीं, बल्कि धातु वाले पेलेट थे। उनका कहना था कि मेडिकल जांच और उपचार के दौरान शरीर से धातु के कई कण बरामद हुए, जो इस दावे को मजबूत करते हैं कि प्रदर्शनकारियों पर मेटल पेलेट का इस्तेमाल किया गया।
मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को असाधारण परिस्थितियों में पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति हो सकती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे हथियारों का उपयोग तय नियमों और चरणबद्ध (ग्रेडेड) प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पेलेट गन के उपयोग से जुड़ी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और नियमों का रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। साथ ही, जंतर-मंतर पर तैनात RAF के गोला-बारूद (अम्युनिशन) का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया है।
याचिका में मांग की गई है कि नागरिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए मेटल पेलेट के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसे हथियार गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं और इनका उपयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा, घायल लोगों को उचित मुआवजा, बेहतर चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
वहीं, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी विशेष मामले में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप हैं, तो उनकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। हालांकि अदालत ने यह भी दोहराया कि यदि नियमों के तहत किसी असाधारण स्थिति में पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति है, तो चुनौती देने वालों को यह साबित करना होगा कि संबंधित मामले में उन नियमों का उल्लंघन हुआ है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई में मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दिशा-निर्देशों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।








