महाराष्ट्र कांग्रेस ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि वर्ष 2011 का अन्ना हजारे आंदोलन केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआंदोलन नहीं था, बल्कि उसके पीछे बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा भी काम कर रहा था। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि उस आंदोलन का इस्तेमाल तत्कालीन यूपीए सरकार को घेरने और राजनीतिक माहौल बदलने के लिए किया गया।
कांग्रेस ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब देश में विभिन्न मुद्दों को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और CJP (Chief Justice of India) से जुड़े विरोध प्रदर्शनों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने अन्ना हजारे के आंदोलन को लोकतंत्र की आवाज बताया था, वही आज अन्य विरोध प्रदर्शनों पर सवाल क्यों उठा रहे हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि अन्ना हजारे के आंदोलन को जनभावनाओं की अभिव्यक्ति माना गया था, तो वर्तमान समय में हो रहे आंदोलनों को अलग नजरिए से देखने का कोई औचित्य नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी विरोध प्रदर्शनों को अपने राजनीतिक हितों के अनुसार सही या गलत बताती है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन का मूल्यांकन उसके मुद्दों और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए, न कि इस आधार पर कि वह किस सरकार के पक्ष या विपक्ष में है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।
वहीं, बीजेपी की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अन्ना हजारे का आंदोलन देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का स्वतःस्फूर्त आंदोलन था और उसे किसी राजनीतिक दल के एजेंडे से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है।
इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर अन्ना हजारे आंदोलन को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुराने आंदोलनों और वर्तमान विरोध प्रदर्शनों की तुलना को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।








