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June 29, 2026 6:57 pm

यूरोप में मौसम बना आफत! गर्मी से पिघली सड़कें, टेढ़ी हुईं पटरियां, लोगों का घरों से निकलना मुश्किल

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यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिसके कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। खासकर France, Germany, Spain, Italy और Portugal में रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में सड़कें पिघलने लगी हैं, रेल पटरियां गर्मी के कारण मुड़ गई हैं और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कई दिनों से पड़ रही तेज धूप और गर्म हवाओं ने बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर प्रभाव डाला है। फ्रांस के कुछ हिस्सों में डामर की सड़कें इतनी गर्म हो गईं कि उनकी सतह नरम पड़ गई, जबकि जर्मनी में अत्यधिक तापमान के कारण कुछ रेल पटरियों में विकृति आने की खबरें सामने आई हैं। इसके चलते कई ट्रेनों की गति कम करनी पड़ी और कुछ सेवाओं में देरी भी हुई।

भीषण गर्मी का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं है। कई शहरों में लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष स्वास्थ्य परामर्श जारी किए हैं। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।

फ्रांस में कई क्षेत्रों के लिए उच्च स्तर की हीट चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव, सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की अतिरिक्त व्यवस्था और कूलिंग सेंटर खोलने जैसे कदम उठाए हैं। वहीं जर्मनी में रेलवे विभाग लगातार पटरियों और अन्य बुनियादी ढांचे की निगरानी कर रहा है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

स्पेन और इटली जैसे देशों में भी तापमान कई स्थानों पर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है और दमकल विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कुछ क्षेत्रों में आग की घटनाओं को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल रही हैं। लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि परिवहन, ऊर्जा आपूर्ति, कृषि और जल संसाधनों पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए देशों को अपने बुनियादी ढांचे को अधिक जलवायु-अनुकूल बनाना होगा।

यूरोप के कई शहरों में नागरिकों से अपील की गई है कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, धूप में लंबे समय तक रहने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना रह सकता है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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