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July 21, 2026 10:30 pm

30वां राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित, 276 से अधिक भामाशाहों, प्रेरकों एवं एनआरआई दानदाताओं का हुआ सम्मान

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भामाशाहों को विश्वास दिलाता हूं कि उनके द्वारा दिए गए धन का पूरा सदुपयोग शिक्षा के विकास के लिए होगा- शिक्षा मंत्री

 

जयपुर। शिक्षा के क्षेत्र में जनसहभागिता और सामाजिक योगदान को सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह 2026 का आयोजन सोमवार को जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में 276 से अधिक भामाशाहों, प्रेरकों एवं एनआरआई दानदाताओं को शिक्षा विभूषण, शिक्षा भूषण, प्रेरक सम्मान से सम्मानित किया गया। इन भामाशाहों से वित्त वर्ष 2025-26 में 318 करोड़ रुपए का सहयोग प्राप्त हुआ है। इस मौके पर भामाशाह प्रशस्ति पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

समारोह में उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि भामाशाह सम्मान समारोह के दिन केवल सम्मान का दिन नहीं है बल्कि आत्मा के उत्सव का दिन है, संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने कहा कि सम्पत्ति का सबसे बड़ा सौन्दर्य है उसका समाज के लिए समर्पण। राजस्थान वीरों के साथ ही दानवीरों की धरती भी है। यहां तलवार के साथ ही त्याग भी देखने को मिलता है। मंच के समक्ष बैठे सभी व्यक्ति भामाशाह की परम्परा के प्रतिनिधि है। धन कमाना योग्यता हो सकती है, लेकिन धन का समाज के लिए उपयोग महानता का प्रतीक है। अब राजस्थान की पहचान केवल किलों से नहीं बल्कि हमारे विद्यालयों से, हमारी बालिकाओं की प्रगति से होगी।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने संबोधन में कहा कि मेवाड़ की शौर्य गाथा महाराणा प्रताप और भामाशाह के बिना अधूरी है। उन्होंने भामाशाह पूनम चंद राठी का नाम लेकर धन्यवाद ज्ञापित किया, जिनकी सहायता से बीकानेर के जयमलसर में राजकीय बालिका सैन्य विद्यालय बन रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय अब और सुरक्षित व तकनीकी रूप से समक्ष बन रहे हैं। अब श्यामपट्ट की जगह विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड आ गए हैं। भामाशाहों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए एक विशेष सेल गठित की जा रही है, जो पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कार्य करेगी। विद्यालय की प्रबंधन समिति में भामाशाहों के दो प्रतिनिधि भी होंगे। ऐसे कई प्रयास है जो विभाग की ओर से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं भामाशाहों को विश्वास दिलाता हूं कि उनके द्वारा प्रदान किए गए धन को पूरा सदुपयोग शिक्षा के विकास के लिए ही होगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने महाराणा प्रताप व भामाशाह के त्याग को याद करते हुए प्रदेश में शिक्षा की उन्नति के लिए आगे आने वाले भामाशाहों को धन्यवाद दिया। उन्होंने विभाग के प्रयासों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्यमंत्री विद्यादान कोष व ज्ञान संकल्प पोर्टल का जिक्र करते हुए बताया कि विभाग की ओर से भामाशाहों के लिए पूरी प्रक्रिया सरल व पारदर्शी बनाई गई है।

राजस्थान के उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षामंत्री मदन दिलावर, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव, मिड डे मील आयुक्त विश्वमोहन शर्मा, राज्य परियोजना निदेशक एवं समग्र शिक्षा राजस्थान आयुक्त डॉ.रश्मि शर्मा, माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट एवं निदेशक राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल राजस्थान महेंद्र सिंह खींची, सम्मानित होने वाले भामाशाह, विशिष्ठ भामाशाह, प्रेरक, समस्त विभागीय उपायुक्त एवं स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी/कार्मिक उपस्थित रहे।

दानदाताओं को मिला सम्मान
समारोह में राजकीय विद्यालय भवन निर्माण, अतिरिक्त निर्माण कार्य, निर्मित भवनों के विकास, भूमि उपलब्ध कराने तथा अन्य भौतिक संसाधनों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 276 से अधिक भामाशाह, प्रेरक एवं एनआरआई दानदाताओं को सम्मानित किया जाएगा। 154 भामाशाहों में से 49 भामाशाह को शिक्षा विभूषण व 105 भामाशाहों को  शिक्षा भूषण सम्मान से नवाजा गया। 99 प्रेरकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में 23 एनआरआई दानदाता भी शामिल है।

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