नई दिल्ली: लंबे अंतराल के बाद भारत और Iran के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर एक अहम कदम सामने आया है। करीब सात साल बाद भारत ने ईरान से कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का आयात फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इस कदम को देश की ऊर्जा सुरक्षा और बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट किया है कि इस बार भुगतान प्रणाली को लेकर कोई बड़ी बाधा नहीं होगी। पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भुगतान तंत्र से जुड़ी समस्याओं के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ था। अब नए व्यवस्थागत उपायों और कूटनीतिक प्रयासों के चलते रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
India की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। देश में औद्योगिक विकास, परिवहन और घरेलू उपयोग के लिए तेल और गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ईरान से आयात फिर शुरू होना सप्लाई को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से तेल आयात भारत के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि ईरान अक्सर प्रतिस्पर्धी दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराता है। इससे भारत को ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और महंगाई पर भी कुछ हद तक असर पड़ सकता है।
इस फैसले के कूटनीतिक मायने भी हैं। भारत और Iran के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, और ऊर्जा सहयोग हमेशा इस रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। नए सिरे से व्यापार शुरू होने से दोनों देशों के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस कदम पर अंतरराष्ट्रीय नजरें भी टिकी हुई हैं, खासकर पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया को लेकर। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपने आर्थिक हितों और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
सरकार और ऊर्जा कंपनियां अब लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और भुगतान प्रणाली को लेकर अंतिम तैयारियों में जुटी हैं, ताकि आयात प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो सके। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह समझौता कितने बड़े स्तर पर लागू होता है और इसका घरेलू बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है।
कुल मिलाकर, India और Iran के बीच यह नई शुरुआत न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि व्यापक आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों में भी एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।







