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March 26, 2026 1:42 pm

मौत के बाद भी इलाज! गुरुग्राम अस्पताल ने 5 लाख वसूले, फिर डेढ़ लाख और मांगे; स्वजन ने लगाया सड़क जाम

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गुरुग्राम के सेक्टर-49 स्थित पार्क अस्पताल में एक सड़क हादसे में घायल युवक की मौत के बाद भी इलाज के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने युवक की मौत होने के बावजूद उसे जिंदा बताकर तीन दिनों में 5 लाख रुपये से अधिक वसूल लिए। जब परिवार ने दूसरे अस्पताल (AIIMS) में शिफ्ट करने की बात की, तब अस्पताल ने मौत की सूचना दी और AIIMS रेफर के नाम पर डेढ़ लाख रुपये और मांगे।

इसके बाद बुधवार रात परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और बाहर मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और उचित कार्रवाई की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

परिजनों के अनुसार, युवक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसे पार्क अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार का दावा है कि मौत 24 घंटे के अंदर हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल ने लगातार युवक को जिंदा बताते हुए इलाज चालू रखा और बिल बढ़ाता रहा। तीन दिनों तक इलाज के नाम पर 5 लाख रुपये से ज्यादा की राशि ली गई।

जब परिजन मरीज को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कर रहे थे, तब अस्पताल ने मौत की पुष्टि की। इसके साथ ही AIIMS रेफर करने के नाम पर अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये की डिमांड की गई। परिवार ने इसे साफ तौर पर जिंदा बताकर पैसे वसूलने की साजिश बताया।

परिजनों ने कहा, “हमने तीन दिनों में 5 लाख से ज्यादा दिए। मौत हो चुकी थी, फिर भी इलाज का बिल बढ़ाते रहे। जब शिफ्ट करने की बात की तो मौत बताई और और पैसे मांगे।”

अस्पताल का पक्ष

अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया।

परिजनों की मांग

परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ मेडिकल निगरानी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि अन्य मरीजों के साथ ऐसा न हो।

यह मामला गुरुग्राम में निजी अस्पतालों द्वारा कथित अधिक बिलिंग और मेडिकल लूट को लेकर पहले से चले आ रहे विवादों को फिर ताजा कर रहा है।

पुलिस जांच शुरू सेक्टर-49 थाने की पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर ली है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में अस्पताल के डॉक्टरों, बिलिंग विभाग और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर सवाल उठा रही है कि क्या निजी अस्पतालों में मरीज की जान से ज्यादा बिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है? डिजिटल युग में भी मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता और नैतिकता की कितनी जरूरत है, यह मामला उसकी याद दिलाता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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