पाकिस्तान में आर्थिक संकट अब चरम पर पहुंच गया है। आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर IMF की EMI (किस्त) चुकाने की भारी टेंशन सवार है, जिसके चलते सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों (SOEs) के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दी है। साथ ही, ईंधन (फ्यूल) पर सख्त कर्ब्स लगाए गए हैं, सरकारी वाहनों की संख्या 60 प्रतिशत तक कम की गई है, और मंत्रियों-विधायकों की सैलरी-भत्तों में भारी कटौती की गई है। इन उपायों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है, और देश को एक बार फिर ‘लालटेन युग’ (लोड शेडिंग और अंधेरे के दौर) में धकेल दिया गया है।
IMF का दबाव और EMI की मार पाकिस्तान ने IMF से 7 बिलियन डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत मदद ली है, लेकिन इसके बदले में सख्त शर्तें थोपी गई हैं। इनमें टैक्स कलेक्शन बढ़ाना, पावर सेक्टर में सुधार, सब्सिडी कम करना, और सरकारी खर्चों में कटौती शामिल है। हाल के दिनों में IMF रिव्यू मिशन के साथ बातचीत में पाकिस्तान को और कड़े लक्ष्य दिए गए हैं, जिसमें सैलरी कट और फ्यूल कर्ब्स जैसे उपाय शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों ही IMF से आने वाली अगली किस्त (EMI) पर निर्भर हैं, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने के कगार पर है। पिछले सालों में पाकिस्तान ने कई बार IMF से बेलआउट लिया, लेकिन अब सर्कुलर डेट (पावर सेक्टर में 5 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा) और बैलेंस ऑफ पेमेंट संकट ने स्थिति और बिगाड़ दी है।
‘लालटेन युग’ की वापसी: लोड शेडिंग से हाहाकार IMF की शर्तों के चलते पावर सेक्टर में सुधार न होने से लोड शेडिंग फिर से शुरू हो गई है। कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा और ग्रामीण इलाकों में 6 से 12 घंटे तक बिजली गायब रह रही है। K-Electric और IESCO जैसे डिस्को ने मार्च 2026 में कई फीडरों पर शेड्यूल्ड और अनशेड्यूल्ड शटडाउन घोषित किए हैं। सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में 12-24 घंटे की लोड शेडिंग की खबरें आ रही हैं। लोगों का कहना है कि गर्मियों से पहले ही सर्दियों में बिजली कटौती से जीवन ठप हो गया है। पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है, क्योंकि ट्यूबवेल बंद रहते हैं। कई इलाकों में लोग लालटेन और कैंडल्स पर निर्भर हैं – इसी से ‘लालटेन युग’ का नाम पड़ा है।
जनता की परेशानी और राजनीतिक बयानबाजी सैलरी कट से लाखों सरकारी कर्मचारी और SOE वर्कर्स प्रभावित हैं। फ्यूल अलाउंस खत्म होने से सरकारी अफसरों को परेशानी हो रही है। आम आदमी कह रहा है, “IMF EMI चुकाने के चक्कर में मुल्क को अंधेरे में धकेल दिया गया।” सोशल मीडिया पर #LanternYug और #LoadSheddingPakistan ट्रेंड कर रहे हैं। विपक्षी नेता इमरान खान के समर्थक इसे आसिम मुनीर की ‘पावर कंसॉलिडेशन’ की नाकामी बता रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि ये अस्थायी उपाय हैं और IMF से मिलने वाली मदद से अर्थव्यवस्था पटरी पर आएगी।
आगे क्या? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर IMF की अगली किस्त समय पर नहीं आई या पावर सेक्टर रिफॉर्म्स नहीं हुए, तो लोड शेडिंग और बढ़ सकती है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब IMF, चीन और गल्फ देशों के कर्ज पर टिकी है। आसिम मुनीर पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि आर्मी की इमेज भी इससे जुड़ी है। जनता उम्मीद कर रही है कि जल्द कोई राहत मिले, वरना ‘लालटेन युग’ लंबा खिंच सकता है।
पाकिस्तान का यह संकट अब सिर्फ आर्थिक नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। क्या IMF की शर्तें मुल्क को बचा पाएंगी या और गहरे संकट में धकेलेंगी? आने वाले दिनों में साफ होगा।






