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March 14, 2026 2:27 pm

अमेरिका को लगा झटका! सद्दाम की हार से सीखकर ईरान ने बनाया ‘मोजेक डिफेंस डॉक्ट्रिन’, अब जंग बिना सरदार के भी जारी

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अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान की जवाबी कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रही। मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार जारी हैं, गल्फ देशों के तेल ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, और युद्ध का दायरा 2000 मील से ज्यादा फैल चुका है। इसका राज है ईरान की वो खास रणनीति—‘डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस डॉक्ट्रिन’ (Decentralized Mosaic Defense Doctrine), जिसे ईरान ने सद्दाम हुसैन के 2003 में अमेरिका के सामने मात्र 26 दिनों में ढह जाने से गहरा सबक लेकर तैयार किया था।

सद्दाम की हार से ईरान ने क्या सीखा?

2003 में अमेरिकी सेना ने इराक पर हमला किया। सद्दाम हुसैन की सेना केंद्रीकृत (Centralized) थी—सारा कमांड एक जगह से चलता था। जैसे ही बगदाद पर हमला हुआ, लीडरशिप और कमांड सेंटर नष्ट हो गए, और पूरी आर्मी बिखर गई। ईरान ने ये देखा और तय किया—हम कभी ऐसा नहीं होने देंगे।

ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने 2005 से इस दिशा में काम शुरू किया। उन्होंने 2007 में IRGC कमांडर बनने के बाद इस डॉक्ट्रिन को लागू किया। ईरान ने पिछले 20 सालों में अमेरिका की इराक-अफगानिस्तान जंगों का गहरा अध्ययन किया और निष्कर्ष निकाला—केंद्रीकृत सेना को “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” (लीडरशिप को निशाना बनाकर मारना) से आसानी से खत्म किया जा सकता है।

‘मोजेक डिफेंस डॉक्ट्रिन’ क्या है?

  • मोजेक का मतलब है—टाइल्स की तरह छोटे-छोटे टुकड़े। ईरान ने अपनी सेना को कई स्वतंत्र “मोजेक” (क्षेत्रीय) यूनिट्स में बांट दिया।
  • हर प्रांत, हर क्षेत्र में सेमी-ऑटोनॉमस कमांड (अर्ध-स्वतंत्र कमांड) बनाए गए।
  • अगर टेहरान पर हमला हो, लीडरशिप खत्म हो जाए, या कम्युनिकेशन कट जाए—तो भी हर यूनिट अपने आप फैसले ले सकती है।
  • पहले से तैयार कंटिंजेंसी प्लान (आपातकालीन योजनाएं), ओवरलैपिंग कमांड चेन, और रिडंडेंसी (दोहराव) से सुनिश्चित किया गया कि सिस्टम चले रहे।
  • IRGC, बसिज मिलिशिया, मिसाइल फोर्स, नेवी और प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती आदि) सब अलग-अलग “टाइल्स” की तरह काम करते हैं।
  • असिमेट्रिक वॉरफेयर पर फोकस—सस्ते ड्रोन (शाहेद जैसे), मिसाइलें, और अट्रिशन (लंबी लड़ाई से दुश्मन को थकाना)।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था—”हमने दो दशकों में अमेरिका की हार का अध्ययन किया। राजधानी पर बमबारी से हमारी जंग की क्षमता पर कोई असर नहीं। मोजेक डिफेंस हमें तय करने की ताकत देता है कि युद्ध कब और कैसे खत्म होगा।”

अमेरिका-इज़राइल के लिए क्यों मुश्किल?

  • सामान्य युद्ध में लीडरशिप मारकर दुश्मन को हरा दिया जाता है, लेकिन यहां “सिर काटो तो भी शरीर लड़ता रहेगा”।
  • युद्ध अब बिना सेंट्रल कमांड के चल रहा है—क्षेत्रीय कमांडर अपने स्तर पर हमले कर रहे हैं।
  • अमेरिका को लगातार डिफेंसिव रहना पड़ रहा है, क्योंकि ईरान की हर “टाइल” अलग से अटैक कर सकती है।
  • विशेषज्ञों का कहना है—ये डॉक्ट्रिन ईरान को “सुइसाइड-प्रूफ” (आत्मघाती हमलों से बचाव) बनाती है, क्योंकि रिजीम ढहने के बाद भी लड़ाई जारी रह सकती है।

ईरान की ये रणनीति अब असल में काम कर रही है। खामेनेई की मौत के बाद भी मिसाइल हमले, ड्रोन अटैक और प्रॉक्सी ग्रुप्स की एक्टिविटी बढ़ गई है। अमेरिका और इज़राइल के लिए ये जंग अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि लंबी अट्रिशन वाली लड़ाई बन गई है—और मोजेक डॉक्ट्रिन ने ईरान को “बिना सरदार के भी अजेय” बना दिया है।

Rashima Repoter
Author: Rashima Repoter

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