डायबिटीज का साइलेंट अटैक! अनियंत्रित शुगर आंखों की रोशनी छीन रही है – डॉक्टर बोले: जांच करवाएं वरना पछताएंगे
जयपुर, 12 मार्च 2026 – भारत में डायबिटीज अब महामारी का रूप ले चुकी है। ICMR की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, और राजस्थान में ही लाखों मरीज हैं। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि डायबिटीज सिर्फ शुगर लेवल नहीं बढ़ाती – यह चुपके-चुपके आपकी आंखों की रोशनी भी छीन सकती है। जयपुर के प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञों और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स ने गंभीर चेतावनी जारी की है: अनियंत्रित डायबिटीज से डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) हो रही है, जो आंखों की रोशनी का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुकी है।
क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी?
डायबिटिक रेटिनोपैथी आंखों के रेटिना (पीछे की परत) की बीमारी है, जो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर से होती है। रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, लीकेज होती है, सूजन आती है, नए कमजोर रक्त वाहिकाएं बनती हैं और अंत में रक्तस्राव या रेटिना डिटैचमेंट हो जाता है। शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते – यही कारण है कि इसे साइलेंट अटैक कहा जाता है। जब लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
प्रमुख लक्षण (जब बीमारी बढ़ जाती है):
- आंखों के सामने धुंधला दिखना या ब्लर विजन
- फ्लोटर्स (काले धब्बे या मकड़ी जैसी आकृतियां तैरती दिखना)
- रंगों में फीका पड़ना
- रात में कम दिखना
- अचानक विजन लॉस या आंखों के सामने काला पर्दा पड़ना
डॉ. रवि शर्मा (जयपुर के नेत्र रोग विशेषज्ञ, एसएमएस हॉस्पिटल से जुड़े) ने बताया, “हमारे पास हर हफ्ते 20-25 ऐसे मरीज आते हैं जिनकी एक या दोनों आंखों की रोशनी लगभग चली गई है। ज्यादातर को 8-10 साल से डायबिटीज है, लेकिन उन्होंने कभी आंखों की जांच नहीं कराई। अगर साल में एक बार फंडस एग्जामिनेशन (रेटिना चेकअप) करा लिया जाए, तो 90% मामलों में रोशनी बचाई जा सकती है।”
अनियंत्रित शुगर क्यों इतनी खतरनाक?
- HbA1c अगर 7% से ज्यादा रहता है, तो रेटिनोपैथी का खतरा 3-4 गुना बढ़ जाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल साथ में हों तो नुकसान और तेज।
- धूम्रपान और मोटापा स्थिति को और बिगाड़ते हैं।
- महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान अनियंत्रित डायबिटीज से रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ सकती है।
डॉक्टरों की सख्त चेतावनी
जयपुर के फोर्टिस हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अनीता मेहता ने कहा, “डायबिटीज वाले हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच करवानी चाहिए – खासकर फंडस फोटोग्राफी या ऑप्थल्मोस्कोपी। शुरुआती स्टेज में लेजर ट्रीटमेंट, इंजेक्शन (एंटी-VEGF) या सर्जरी से रोशनी पूरी तरह बचाई जा सकती है। लेकिन जब रेटिना में भारी रक्तस्राव या डिटैचमेंट हो जाता है, तब इलाज बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है।”
बचाव के आसान उपाय – आज से अपनाएं
- शुगर कंट्रोल रखें – HbA1c को 7% से नीचे रखने की कोशिश करें।
- रोजाना जांच – घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर चेक करें।
- आंखों की सालाना जांच – डायबिटीज डायग्नोज होने के बाद पहली जांच तुरंत, फिर हर साल।
- स्वस्थ जीवनशैली – संतुलित डाइट, 30 मिनट वॉक, वजन कंट्रोल, BP और कोलेस्ट्रॉल मैनेज करें।
- धूम्रपान और शराब छोड़ें – ये आंखों की रक्त वाहिकाओं को और नुकसान पहुंचाते हैं।
- लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर – छोटी सी ब्लरनेस को नजरअंदाज न करें।
जयपुर में क्या स्थिति?
जयपुर में डायबिटीज रेटिनोपैथी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एसएमएस हॉस्पिटल, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, फोर्टिस, नारायणा और अन्य नेत्र अस्पतालों में स्पेशल डायबिटिक रेटिना क्लिनिक चल रहे हैं। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण ज्यादातर मरीज बहुत लेट स्टेज में पहुंचते हैं।
डॉक्टरों का एकमत संदेश है: “डायबिटीज आपकी आंखों की रोशनी चुपके से छीन रही है। जांच करवाएं, वरना पछतावा ही बचेगा।”
अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज का मरीज है, तो आज ही नेत्र विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट लें। समय पर जांच से लाखों की रोशनी बचाई जा सकती है।






