विटामिन डी की कमी आजकल बहुत आम समस्या बन गई है। लोग सप्लीमेंट्स (खासकर विटामिन D3) लेते हैं, धूप भी लेते हैं, लेकिन ब्लड टेस्ट में लेवल फिर भी कम रहता है। डॉक्टरों और हालिया रिसर्च के अनुसार, इसके पीछे कई आम गलतियां होती हैं, जिन्हें सुधारने से लेवल तेजी से बढ़ सकता है।
यहां 5 सबसे बड़ी गलतियां हैं, जिनसे बचें:
- सप्लीमेंट को फैट के साथ न लेना विटामिन डी फैट-सॉल्युबल होता है, यानी इसे अब्सॉर्ब होने के लिए फैट की जरूरत पड़ती है। अगर आप इसे खाली पेट या बिना तेल/घी वाली चीज के साथ लेते हैं, तो शरीर में सिर्फ 20-30% ही अब्सॉर्ब होता है। सही तरीका: सप्लीमेंट को दूध, दही, घी, बादाम या किसी फैटी मील के साथ लें। इससे अब्सॉर्प्शन 30-50% तक बढ़ जाता है।
- मैग्नीशियम की कमी होना विटामिन डी को एक्टिव फॉर्म (उपयोगी रूप) में बदलने के लिए मैग्नीशियम बहुत जरूरी है। अगर बॉडी में मैग्नीशियम कम है, तो कितना भी D3 लें, वह इनएक्टिव रह जाता है और लेवल नहीं बढ़ता। कई स्टडीज में पाया गया है कि मैग्नीशियम सप्लीमेंट के साथ D3 लेने से लेवल ज्यादा तेज बढ़ता है। सही तरीका: डाइट में पालक, कद्दू के बीज, बादाम, डार्क चॉकलेट, केला शामिल करें या डॉक्टर से मैग्नीशियम चेक करवाएं।
- गलत डोज या गलत फॉर्म चुनना कई लोग 1000-2000 IU रोज लेते हैं, लेकिन गंभीर कमी में यह काफी नहीं होता। साथ ही, विटामिन D2 (प्लांट बेस्ड) की बजाय D3 (एनिमल बेस्ड) ज्यादा प्रभावी होता है। सस्ते या लो-क्वालिटी सप्लीमेंट्स भी कम असर करते हैं। सही तरीका: डॉक्टर से ब्लड टेस्ट (25-hydroxy vitamin D) करवाकर सही हाई-डोज (जैसे 60,000 IU वीकली) लें, और हमेशा D3 चुनें।
- ज्यादा बॉडी फैट या मोटापा बॉडी में एक्स्ट्रा फैट होने पर विटामिन डी फैट सेल्स में फंस जाता है और ब्लड में उपलब्ध नहीं होता। इसलिए मोटापे वाले लोगों को सामान्य से ज्यादा डोज की जरूरत पड़ती है। सही तरीका: वजन कंट्रोल करें, एक्सरसाइज बढ़ाएं। डॉक्टर अक्सर ऐसे लोगों को हाई डोज देते हैं।
- लीवर/किडनी की समस्या या अब्सॉर्प्शन इश्यू विटामिन डी को एक्टिव करने के लिए लीवर और किडनी की जरूरत होती है। अगर लीवर/किडनी कमजोर हैं, या गट प्रॉब्लम (जैसे IBS, सेलियक, क्रोहन) है, तो अब्सॉर्प्शन नहीं होता। कुछ दवाएं (स्टेरॉयड, एंटी-एपिलेप्टिक) भी दखल देती हैं। सही तरीका: अगर 2-3 महीने में भी लेवल नहीं बढ़े, तो डॉक्टर से लीवर/किडनी फंक्शन, PTH लेवल या गट हेल्थ चेक करवाएं।
नोट: कभी भी खुद से हाई-डोज सप्लीमेंट न लें, क्योंकि ज्यादा विटामिन डी से टॉक्सिसिटी (हाइपरकैल्सेमिया) हो सकती है। हमेशा डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट करवाकर ही डोज एडजस्ट करें। धूप (सुबह 10-15 मिनट बिना सनस्क्रीन), फैटी फिश और फोर्टिफाइड फूड्स को भी जारी रखें।
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