नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने बिहार की राजनीति में तूफान मचा दिया है। 5 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन था, और इसी बीच जदयू (JDU) के कार्यकर्ताओं में भारी बवाल और भावुक विरोध देखने को मिला।
कार्यकर्ता पटना में मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) के बाहर जुट गए। वे फूट-फूटकर रो रहे थे और नारे लगा रहे थे जैसे:
- “नीतीश कुमार जिंदाबाद!”
- “बिहार छोड़कर दिल्ली नहीं जाने देंगे!”
- “नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री रहना चाहिए!”
कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के अभिभावक हैं, उन्हें दिल्ली नहीं भेजा जाना चाहिए। कुछ ने यहां तक कहा कि अगर नीतीश को हटाया गया तो आंदोलन होगा, आत्मदाह तक की चेतावनी दी गई। वे चाहते थे कि राज्यसभा जाना हो तो नीतीश के बेटे निशांत कुमार जाएं, लेकिन नीतीश बिहार में ही मुख्यमंत्री बने रहें।
कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी के कुछ नेताओं (जैसे ललन सिंह, संजय झा) पर साजिश का आरोप लगाया और उन्हें “जयचंद” तक कहा। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी, और प्रदर्शनकारियों ने कुछ विधायकों को रोकने की कोशिश भी की।
नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया पर राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की थी, और खबरों के अनुसार वे नामांकन दाखिल करने वाले थे (केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में)। इससे जुड़ी अटकलों में यह भी है कि बिहार में नया मुख्यमंत्री (संभवतः BJP से) आ सकता है, जबकि नीतीश केंद्र में भूमिका निभा सकते हैं।
यह घटना JDU में गहरी भावनात्मक नाराजगी दिखाती है, जहां कार्यकर्ता नीतीश को बिहार की राजनीति से अलग नहीं होने देना चाहते। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।






