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October 24, 2026 3:12 pm

खाड़ी में इंटरनेट केबल काटने की ईरान की धमकी से कितना होगा नुकसान? जानें दुनिया के वेब ट्रैफिक पर क्या पड़ेगा असर

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ईरान की ओर से फारस की खाड़ी के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की संभावित योजना ने वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया है कि अगर अमेरिका और इजरायल दोबारा ईरान पर हमला करते हैं, तो तेहरान समुद्र के नीचे बिछे इन केबल नेटवर्क को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इन केबलों के क्षतिग्रस्त होने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद होने की आशंका कम है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट, ऑनलाइन भुगतान और क्लाउड सेवाएं कई सप्ताह तक प्रभावित हो सकती हैं।

समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलें क्यों हैं इतनी महत्वपूर्ण?

आज दुनिया में इंटरनेट के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों से गुजरता है। ये केबलें अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं और इनके जरिए वेबसाइट, वीडियो, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स तथा क्लाउड सेवाओं का डेटा एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है।

इन केबलों के भीतर बालों से भी पतले कांच के फाइबर होते हैं, जिनके जरिए प्रकाश संकेतों के रूप में डेटा भेजा जाता है। दुनिया भर में ऐसी सैकड़ों केबलें बिछी हुई हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फारस की खाड़ी में मौजूद केबलों के कटने से पूरी दुनिया का इंटरनेट ठप हो जाएगा। टेलीकम्युनिकेशन रिसर्च फर्म TeleGeography के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का हिस्सा वैश्विक स्तर पर एक प्रतिशत से भी कम है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में कौन-कौन सी इंटरनेट केबलें हैं?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके समुद्र तल के नीचे कई महत्वपूर्ण फाइबर-ऑप्टिक केबलें गुजरती हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • Asia-Africa-Europe 1 (AAE-1): यह केबल दक्षिण-पूर्व एशिया को मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ती है। इसके लैंडिंग पॉइंट संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और सऊदी अरब में हैं।
  • FALCON: यह नेटवर्क भारत और श्रीलंका को खाड़ी के देशों, सूडान और मिस्र से जोड़ता है।
  • Gulf Bridge International: यह नेटवर्क खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों को जोड़ता है, जिनमें ईरान भी शामिल है।

इन नेटवर्कों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रांसफर को बनाए रखने में मदद मिलती है।

अगर इंटरनेट केबल कट गई तो क्या होगा?

यदि समुद्र के नीचे बिछी एक केबल क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो आमतौर पर इंटरनेट ऑपरेटर डेटा को दूसरे उपलब्ध नेटवर्क और वैकल्पिक मार्गों से भेज सकते हैं। इसी वजह से एक केबल टूटने पर अक्सर आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को बड़ा अंतर महसूस नहीं होता।

लेकिन अगर एक साथ कई केबलें काट दी जाएं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में खाड़ी क्षेत्र के देशों में इंटरनेट की गति धीमी पड़ सकती है और डिजिटल सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

संभावित प्रभावों में शामिल हैं:

  • इंटरनेट कनेक्टिविटी और डेटा ट्रांसफर की गति कम होना।
  • ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में देरी या रुकावट।
  • ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी सेवाओं पर असर।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर से जुड़ी सेवाओं में व्यवधान।
  • कंपनियों के ऑनलाइन कामकाज और संचार में परेशानी।

हालांकि, नुकसान कितना बड़ा होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑपरेटर कितनी तेजी से ट्रैफिक को दूसरे नेटवर्क पर भेज पाते हैं और वैकल्पिक मार्गों में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

भारत के इंटरनेट पर कितना असर पड़ सकता है?

भारत के लिए समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलें बेहद महत्वपूर्ण हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की 2022 की जानकारी के मुताबिक, भारत में लगभग 17 सबमरीन केबलें 14 केबल लैंडिंग स्टेशनों पर जुड़ती थीं। मुंबई और चेन्नई में ऐसे स्टेशनों की सबसे अधिक सघनता है।

यदि होर्मुज क्षेत्र में कई केबलें क्षतिग्रस्त होती हैं, तो भारत और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय नेटवर्क ऑपरेटर डेटा को किन वैकल्पिक मार्गों से भेज पाते हैं।

लाल सागर से गुजरने वाले नेटवर्क भी एशिया, यूरोप और पूर्वी अफ्रीका के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए महत्वपूर्ण हैं। TeleGeography के अनुसार, वैश्विक अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ की लगभग तीन प्रतिशत मांग लाल सागर से गुजरने वाले मार्गों से जुड़ी है।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि लाल सागर में केबलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में व्यवधान का दायरा अधिक बड़ा हो सकता है। हालांकि, ईरान ने वहां के केबल नेटवर्क को निशाना बनाने की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।

इंटरनेट केबल की मरम्मत में क्यों लगता है इतना समय?

समुद्र के नीचे टूटी इंटरनेट केबल की मरम्मत करना सामान्य तकनीकी काम नहीं है। इसके लिए विशेष जहाजों, प्रशिक्षित इंजीनियरों और समुद्री क्षेत्र में काम करने की अनुमति की जरूरत होती है।

मरम्मत की प्रक्रिया में सबसे पहले इंजीनियर फाइबर के भीतर प्रकाश संकेत भेजकर खराबी की जगह का पता लगाते हैं। इसके बाद विशेष मरम्मत जहाज केबल को समुद्र तल से ऊपर उठाता है। क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर नई केबल जोड़ी जाती है और फाइबर के सिरों को जोड़ने के बाद केबल को दोबारा समुद्र में उतार दिया जाता है।

अमेरिकी नौसेना के अधिकारी रियर एडमिरल माइक ब्रूक्स के अनुसार, 1,500 मीटर से कम गहरे पानी में जहाज के मौके पर पहुंचने के बाद मरम्मत में सामान्यतः एक से तीन दिन लग सकते हैं। लेकिन जहाज की उपलब्धता, मौसम और समुद्री क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिलने में लगने वाला समय पूरी प्रक्रिया को लंबा कर सकता है।

उनके अनुसार, 2024 में केबल की मरम्मत में औसतन 51 दिन लगे थे।

दुनिया भर में संचार केबलों की मरम्मत के लिए लगभग 65 केबल जहाज काम करते हैं, जिनमें से करीब 20 मुख्य रूप से मरम्मत के लिए तैनात हैं। यदि युद्ध के दौरान एक ही क्षेत्र में कई केबलें कट जाती हैं, तो मरम्मत के लिए प्राथमिकता तय करना भी चुनौती बन सकता है।

युद्ध के दौरान मरम्मत और मुश्किल क्यों होगी?

सामान्य परिस्थितियों में भी समुद्र के नीचे केबल की मरम्मत में कई तरह की चुनौतियां आती हैं। लेकिन युद्ध के दौरान ये समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

  • समुद्र में सैन्य गतिविधियों और बारूदी सुरंगों का खतरा बढ़ सकता है।
  • मरम्मत जहाजों का बीमा महंगा हो सकता है।
  • दूसरे देशों के समुद्री क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिलने में देरी हो सकती है।
  • क्षतिग्रस्त केबलों की मरम्मत के लिए सीमित संख्या में जहाज उपलब्ध होंगे।
  • युद्ध समाप्त होने के बाद भी समुद्र तल का दोबारा सर्वेक्षण करना पड़ सकता है।

इसका मतलब है कि अगर कई केबलें एक साथ क्षतिग्रस्त होती हैं, तो नेटवर्क को पूरी तरह बहाल होने में कई सप्ताह या उससे भी अधिक समय लग सकता है।

क्या सैटेलाइट इंटरनेट बन सकता है विकल्प?

सैटेलाइट संचार कुछ परिस्थितियों में वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है, लेकिन यह समुद्र के नीचे बिछी केबलों का पूर्ण विकल्प नहीं है।

सबमरीन केबलें बहुत बड़ी मात्रा में डेटा ट्रांसफर कर सकती हैं। इसके मुकाबले सैटेलाइट नेटवर्क की क्षमता सीमित होती है और प्रति यूनिट डेटा ट्रांसफर की लागत भी अधिक हो सकती है। इसके अलावा, सैटेलाइट सेवाओं को भी जमीन पर मौजूद नेटवर्क और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ती है।

इसलिए बड़े पैमाने पर केबल नेटवर्क बाधित होने पर सैटेलाइट सेवाएं कुछ मदद तो कर सकती हैं, लेकिन पूरे अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक को संभालना उनके लिए मुश्किल होगा।

समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काटने पर क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?

समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

1884 में पेरिस में समुद्री टेलीग्राफ केबलों की सुरक्षा से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत समुद्री क्षेत्र में केबल को जानबूझकर या लापरवाही से नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध बनाया गया।

इसके बाद 1982 में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) ने भी समुद्र के नीचे केबलों को नुकसान पहुंचाने से संबंधित नियमों को आगे बढ़ाया।

UNCLOS के अनुच्छेद 113 के अनुसार, देशों को अपने ध्वज वाले जहाजों या अपने अधिकार क्षेत्र के लोगों द्वारा खुले समुद्र के नीचे बिछी केबलों को जानबूझकर या गंभीर लापरवाही से नुकसान पहुंचाने को दंडनीय अपराध बनाना चाहिए। अनुच्छेद 58 इन नियमों को विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तक भी विस्तारित करता है।

हालांकि, युद्ध के दौरान इन प्रावधानों की व्याख्या और उनका व्यावहारिक प्रभाव परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए किसी विशेष कार्रवाई की वैधता का निर्धारण संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून और घटनाक्रम के आधार पर करना होगा।

दुनिया के इंटरनेट के लिए कितना बड़ा खतरा है?

ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र की समुद्री इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की कथित योजना क्षेत्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए गंभीर चिंता पैदा करती है। फिर भी, केवल होर्मुज जलडमरूमध्य में केबलें कटने से दुनिया भर का इंटरनेट बंद होने की आशंका नहीं है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक के लिए कई वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं।

सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होगा, जब एक साथ कई महत्वपूर्ण केबलें क्षतिग्रस्त हों और युद्ध के कारण उनकी मरम्मत में लंबी देरी हो। ऐसी स्थिति में खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, क्लाउड सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

फिलहाल, ईरान की कथित योजना को लेकर सामने आई जानकारी अधिकारियों के बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे क्या कार्रवाई होती है और वैश्विक नेटवर्क ऑपरेटर किस तरह वैकल्पिक कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करते हैं।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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