भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने 10 साल का सफर पूरा कर लिया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI की उपलब्धियों को भारत की डिजिटल पेमेंट यात्रा में एक बड़ा बदलाव बताया और कहा कि इसके पैमाने और पहुंच पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने लोगों से यह भी साझा करने को कहा कि UPI ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को किस तरह बदला है।
2016 में शुरू हुआ था UPI
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अप्रैल 2016 में 21 सदस्य बैंकों के साथ लॉन्च किया था। इसके बाद 25 अगस्त 2016 को इसे आम लोगों के लिए शुरू किया गया। देखते ही देखते UPI भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया।
इसकी खासियत यह है कि मोबाइल के जरिए एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेजे जा सकते हैं। दुकानदारों और कारोबारियों को भुगतान करना भी आसान हुआ है। UPI ने डिजिटल पेमेंट को 24 घंटे उपलब्ध और इंटरऑपरेबल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
10 साल में हजारों गुना बढ़ा UPI का इस्तेमाल
UPI की शुरुआत के समय इसकी पहुंच आज की तुलना में बेहद सीमित थी। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए करीब 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन हो गया। यानी एक दशक में ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 13,000 गुना की वृद्धि हुई।
ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। 2016-17 में करीब ₹0.07 लाख करोड़ से शुरू होकर यह आंकड़ा 2025-26 में लगभग ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इससे पता चलता है कि UPI अब केवल छोटे डिजिटल भुगतान का माध्यम नहीं रहा, बल्कि देश की व्यापक अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका काफी बड़ी हो चुकी है।
जुलाई 2026 में बना नया रिकॉर्ड
UPI ने जुलाई 2026 में अपने अब तक के सबसे ज्यादा मासिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए। इस महीने करीब 2,365.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.87 लाख करोड़ रही।
2026 में UPI पर औसतन करीब 66 करोड़ ट्रांजैक्शन रोजाना हो रहे हैं। जुलाई तक करीब 741 बैंक UPI नेटवर्क पर लाइव थे। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 84 फीसदी रही।
चाय की दुकान से बड़े कारोबार तक बदला भुगतान का तरीका
UPI ने भारत में पैसे भेजने और लेने के तरीके को काफी आसान बना दिया है। पहले छोटे भुगतान के लिए नकदी पर निर्भरता ज्यादा थी, लेकिन अब QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है।
छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, स्थानीय कारोबारियों और ग्राहकों के लिए भी डिजिटल भुगतान की सुविधा आसान हुई है। इससे डिजिटल लेनदेन को शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
वित्तीय समावेशन को भी मिली गति
UPI की सफलता को केवल ट्रांजैक्शन के आंकड़ों से नहीं देखा जा सकता। इसके जरिए बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है। छोटे कारोबारी और आम ग्राहक मोबाइल फोन के जरिए भुगतान स्वीकार या भेज सकते हैं।
यही वजह है कि UPI को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफल पहलों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसकी व्यापक पहुंच और पैमाने को भारत की डिजिटल यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
भारत के बाहर भी UPI की बढ़ती पहचान
UPI की सफलता ने इसे भारत की सीमाओं से बाहर भी चर्चा में ला दिया है। कई देशों के साथ डिजिटल भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाओं और सहयोग के जरिए भारतीय भुगतान तकनीक की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ी है।
भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को अब दुनिया के कई हिस्सों में कम लागत, तेज और सुविधाजनक भुगतान के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
PM मोदी ने लोगों से मांगा UPI का अनुभव
UPI के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपने UPI अनुभव साझा करने की अपील की। उन्होंने पूछा कि UPI ने उनकी जिंदगी में किस तरह बदलाव किया और रोजमर्रा के भुगतान को कितना आसान बनाया।
प्रधानमंत्री का संदेश ऐसे समय आया है जब UPI भारत में रोजाना करोड़ों लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है।
UPI ने बदल दी डिजिटल पेमेंट की तस्वीर
10 साल पहले शुरू हुआ UPI आज भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अहम हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबार तक, ऑनलाइन खरीदारी से लेकर आम व्यक्ति के रोजमर्रा के भुगतान तक इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
आंकड़े बताते हैं कि UPI ने सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या नहीं बढ़ाई, बल्कि भारत में भुगतान करने की पूरी आदत को बदल दिया है। इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी उपलब्धियों और व्यापक पहुंच को हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बताया है।








