नोएडा/निठारी: निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। मामले में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली के कथित तौर पर फांसी दिए जाने के फैसले को लेकर निठारी पीड़ित परिवारों ने सवाल उठाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि इतने वर्षों बाद सामने आए इस घटनाक्रम को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने मामले में सह-आरोपी रहे मोनिंदर सिंह पंढेर की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
‘इतने साल बाद फांसी क्यों लगाएगा?’
पीड़ित परिवारों की ओर से सुरेंद्र कोली के फांसी के फैसले पर अविश्वास जताया गया है। उनका सवाल है कि इतने साल बीत जाने के बाद अब इस तरह का कदम उठाने की बात क्यों सामने आ रही है। पीड़ितों के मुताबिक, निठारी कांड में जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया, वे आज भी पूरे घटनाक्रम की सच्चाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं।
हालांकि, सुरेंद्र कोली से जुड़े किसी ताजा फैसले या फांसी संबंधी घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित प्रशासन, जेल विभाग या न्यायालय के रिकॉर्ड को देखना जरूरी है। केवल सामने आ रहे बयानों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
पंढेर की भूमिका पर भी सवाल
निठारी पीड़ितों ने मोनिंदर सिंह पंढेर को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष और स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि जिन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे, उनके संबंध में न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो।
निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई थी। इन मामलों में अदालतों के फैसले और बाद की अपीलों की स्थिति अलग-अलग रही है। इसलिए किसी एक मामले के घटनाक्रम को पूरे निठारी कांड का अंतिम निष्कर्ष मानना सही नहीं होगा।
पीड़ित परिवारों को अब भी कई सवालों के जवाब का इंतजार
निठारी कांड के बाद पीड़ित परिवारों ने लंबे समय तक न्याय की मांग की। वर्षों बाद भी इस मामले से जुड़ी खबरें सामने आने पर परिवारों की पुरानी पीड़ा और सवाल फिर चर्चा में आ जाते हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें मामले की कानूनी स्थिति, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
फिलहाल, सुरेंद्र कोली के कथित फांसी संबंधी फैसले और पंढेर को लेकर उठाए गए सवालों पर आधिकारिक बयानों का इंतजार है। मामले में आगे की जानकारी संबंधित अदालतों और प्रशासनिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी।








