मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, में बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस ऑपरेशन को “Project Freedom” नाम दिया गया है, जिसके तहत करीब 15,000 अमेरिकी सैनिक, कई युद्धपोत (डेस्ट्रॉयर्स) और 100 से ज्यादा लड़ाकू व निगरानी विमान तैनात किए जाएंगे।
यह मिशन खासतौर पर उन व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए तैयार किया गया है, जो हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा और हमलों के खतरे के कारण फंस गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की अगुवाई में चलने वाले इस ऑपरेशन का मकसद जहाजों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करना और समुद्री रास्ते को खुला रखना है। इसके तहत अमेरिकी नौसेना के डेस्ट्रॉयर्स और अन्य युद्धपोत व्यापारिक जहाजों के साथ एस्कॉर्ट के तौर पर चलेंगे, जबकि आसमान से लड़ाकू विमान लगातार निगरानी करेंगे। ड्रोन और एडवांस सर्विलांस सिस्टम की मदद से संभावित खतरों पर नजर रखी जाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में इस इलाके में जहाजों पर हमलों और ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां चिंतित हैं। ऐसे में अमेरिका का यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इस ऑपरेशन को लेकर क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह मिशन सीधे टकराव का रूप भी ले सकता है। खासतौर पर ईरान और अमेरिका के बीच पहले से चल रहे तनाव के चलते स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
फिलहाल, अमेरिका का दावा है कि “Project Freedom” का उद्देश्य सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाना और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन का असर न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा पर, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।







