मोबाइल पर आने वाले वन टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और लोगों के लिए असली मैसेज की पहचान आसान बनाने की दिशा में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) नया कदम उठाने पर विचार कर रहा है। नियामक की योजना बैंक, ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और दूसरी कंपनियों की ओर से भेजे जाने वाले OTP मैसेज के फॉर्मेट को एक जैसा बनाने की है। इससे यूजर्स को यह समझने में आसानी हो सकती है कि OTP किस सेवा के लिए भेजा गया है और मैसेज किस स्रोत से आया है।
20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, TRAI ने इस प्रस्ताव को लेकर टेलीकॉम कंपनियों के साथ चर्चा की है। इस दिशा में आगे चलकर परामर्श पत्र भी जारी किया जा सकता है। हालांकि, अभी इसे प्रस्तावित कदम के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसे लागू करने की अंतिम तारीख या सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य नियमों की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
OTP मैसेज का फॉर्मेट एक जैसा करने की तैयारी
फिलहाल अलग-अलग बैंक, ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपने-अपने तरीके से OTP मैसेज भेजते हैं। किसी मैसेज में कोड सीधे स्क्रीन पर दिखाई देता है, जबकि कुछ में पूरी जानकारी देखने के लिए मैसेज खोलना पड़ता है। इस अंतर के कारण कई बार लोगों के लिए असली और संदिग्ध मैसेज के बीच फर्क करना मुश्किल हो सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत OTP मैसेज में कुछ जानकारियों को एक तय प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इनमें OTP किस काम के लिए भेजा गया है, मैसेज किस सेवा या संस्था की ओर से आया है और कोड कितनी देर तक वैध रहेगा, जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। इससे लोगों को मैसेज समझने और संदिग्ध संदेशों को पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कैसे कम हो सकता है OTP फ्रॉड का खतरा?
OTP का इस्तेमाल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन खरीदारी और अकाउंट में लॉगिन करने के लिए किया जाता है। साइबर ठग कई बार बैंक या किसी विश्वसनीय कंपनी का कर्मचारी बनकर लोगों से OTP मांगते हैं। कुछ मामलों में वे फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश भी करते हैं।
अगर OTP मैसेज में जानकारी का प्रारूप स्पष्ट और एक जैसा होगा, तो यूजर्स के लिए यह समझना कुछ आसान हो सकता है कि मैसेज किस उद्देश्य से आया है। इसके अलावा, कोड को मोबाइल की स्क्रीन पर बिना मैसेज खोले दिखाने से जुड़े जोखिम कम करने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, केवल फॉर्मेट एक जैसा कर देने से सभी तरह की ऑनलाइन ठगी रुकने की गारंटी नहीं है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने क्या कहा?
इस प्रस्ताव को लेकर विशेषज्ञों की राय मिली-जुली है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एक समान फॉर्मेट से आम लोगों के लिए वास्तविक OTP मैसेज पहचानना आसान हो सकता है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ठग एक जैसे दिखने वाले फॉर्मेट की नकल भी कर सकते हैं। इसलिए मैसेज का प्रारूप बदलने के साथ दूसरे सुरक्षा उपायों की भी जरूरत बनी रहेगी।
डिजिटल सुरक्षा के लिए यह भी जरूरी है कि लोग किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP साझा न करें। बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति फोन पर OTP, PIN या पासवर्ड मांगे, तो ऐसी जानकारी नहीं देनी चाहिए।
पहले से भी चल रहे हैं साइबर फ्रॉड रोकने के प्रयास
दूरसंचार विभाग और टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग तथा संदिग्ध संदेशों पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग उपाय कर रही हैं। इनमें फर्जी मोबाइल कनेक्शन की पहचान, संदिग्ध नंबरों का विश्लेषण और बल्क SMS के लिए निर्धारित मैसेज टेम्पलेट की जांच जैसे उपाय शामिल हैं।
TRAI का प्रस्ताव भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। यदि OTP मैसेज के फॉर्मेट को लेकर स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था लागू होती है, तो इससे डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अतिरिक्त मदद मिल सकती है।
क्या OTP से होने वाली ठगी पूरी तरह बंद हो जाएगी?
इसका जवाब फिलहाल नहीं है। OTP मैसेज का फॉर्मेट एक जैसा होने से जागरूकता बढ़ सकती है और कुछ तरह की धोखाधड़ी पहचानना आसान हो सकता है, लेकिन साइबर ठग दूसरे तरीके भी अपना सकते हैं। इसलिए केवल नियामकीय बदलाव पर निर्भर रहने के बजाय यूजर्स को भी सतर्क रहना होगा।
फिलहाल TRAI की योजना चर्चा के चरण में है। आगे परामर्श पत्र और प्रस्तावित नियमों की जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नया फॉर्मेट कैसा होगा, इसे किन सेवाओं पर लागू किया जाएगा और इसके लागू होने की समयसीमा क्या होगी।








