


“हे स्वामी, गरिमामय हो तेरा नाम ! मैं किसकी शरण में जाऊँगा जबकि सच में, तू ही मेरा ईश्वर है और मेरा प्रिय है, मैं

“ऐ लोगो ! ऐसा कोई भी काम न करो जिससे तुम्हें लज्जित होना पड़े अथवा लोगों की दृष्टि में प्रभुधर्म का अपमान हो। तुम षड्यंत्र

“जंगली जानवरों की तरह व्यवहार करना मनुष्यों को शोभा नहीं देता। जो गुण उसके सम्मान के योग्य हैं वे हैं सहनशीलता, दया, प्रेम, सहानुभूति और
“सावधान रहो, किसी की अनुपस्थिति में उसकी अनुमति के बिना तुम उसके घर में प्रवेश न कर जाओ। हर परिस्थिति में औचित्यपूर्ण आचरण करो और
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