
हे अस्तित्व के पुत्र ! यदि दरिद्रता तुझे ग्रस्त कर ले तो दुःखी न हो, क्योंकि यथासमय वैभव का स्वामी तुझ तक पदार्पण करेगा। दुर्भाग

हे मनुष्य के पुत्र ! यदि तुझे अपार वैभव प्राप्त हो जाए तो हर्षोन्मादि हो और यदि तुझ पर दुर्भाग्य टूट पड़े तो शोकाकुल न

हे चेतना के पुत्र ! तेरे लिए शांति नहीं है सिवाय इसमें कि तू अपने आपको तज दे और मेरी ओर अभिमुख हो, क्योंकि तुझे

हे चेतना के पुत्र ! दीन-हीन पर शेखी न बघार, क्योंकि मैं उस मार्गदर्शन करता हूँ और जब तुझे कुचेष्टा करते हुए देखन हूँ तब
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