एयर इंडिया की एक फ्लाइट के अचानक करीब 300 फीट नीचे आने की घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक आई इस गिरावट के बाद यात्रियों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना के बाद विमान के संचालन, तकनीकी परिस्थितियों और कॉकपिट में मौजूद पायलटों की स्थिति समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है। इसी क्रम में पायलट के नशे में होने की आशंका को लेकर की जाने वाली मेडिकल और ड्रग जांच भी चर्चा में आ गई है।
अचानक 300 फीट नीचे कैसे आया विमान?
उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव को सामान्य स्थिति नहीं माना जाता, हालांकि इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। मौसम, एयर पॉकेट, टर्बुलेंस, विमान के संचालन से जुड़ी परिस्थितियां या पायलट के नियंत्रण से जुड़े कई कारणों की जांच की जा सकती है।
ऐसी घटना के बाद विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जाती है। इनमें विमान की ऊंचाई, गति, दिशा, पायलट के इनपुट और उस समय मौजूद अन्य तकनीकी पैरामीटर की जानकारी मिल सकती है। जांचकर्ता इन आंकड़ों के आधार पर यह समझने की कोशिश करते हैं कि विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव किस वजह से हुआ।
पायलट के ड्रग टेस्ट की चर्चा क्यों?
किसी विमानन घटना की जांच में पायलट और चालक दल की फिटनेस भी महत्वपूर्ण पहलू होती है। यदि किसी घटना के बाद पायलट के नशे में होने की आशंका सामने आती है, तो संबंधित नियमों के तहत मेडिकल जांच और निर्धारित परीक्षण किए जा सकते हैं।
ड्रग टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि पायलट के शरीर में प्रतिबंधित या प्रभावित करने वाले किसी पदार्थ की मौजूदगी तो नहीं थी। हालांकि केवल किसी टेस्ट की प्रक्रिया शुरू होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पायलट नशे में था। अंतिम निष्कर्ष जांच और अधिकृत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
ड्रग टेस्ट में क्या जांचा जाता है?
विमानन क्षेत्र में मेडिकल जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की जाती है। इसमें संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति और आवश्यकतानुसार जैविक नमूनों की जांच शामिल हो सकती है। टेस्ट के परिणामों को विशेषज्ञों द्वारा देखा जाता है और यदि कोई संदिग्ध परिणाम सामने आता है तो आगे की पुष्टि के लिए अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए किसी प्रारंभिक जांच या स्क्रीनिंग रिपोर्ट को सीधे अंतिम निष्कर्ष मानना सही नहीं होगा। कई बार प्रारंभिक परीक्षण के बाद पुष्टि के लिए अतिरिक्त लैब टेस्ट भी किए जाते हैं।
सिर्फ पायलट ही नहीं, तकनीकी पहलू भी जांच के दायरे में
विमान के अचानक नीचे आने की घटना की जांच केवल पायलट तक सीमित नहीं रहती। जांचकर्ता विमान के तकनीकी सिस्टम, ऑटो-पायलट, फ्लाइट कंट्रोल, मौसम की स्थिति, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत और उड़ान के दौरान विमान के प्रदर्शन का भी विश्लेषण करते हैं।
इसके अलावा यह भी देखा जा सकता है कि विमान किस ऊंचाई पर उड़ रहा था, उस समय मौसम कैसा था और क्या किसी तरह की टर्बुलेंस या एयर पॉकेट की स्थिति मौजूद थी। यदि विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव हुआ, तो यह पता लगाना जरूरी होता है कि वह बदलाव किस कारण से हुआ और क्या चालक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रतिक्रिया दी।
ब्लैक बॉक्स से मिल सकती है अहम जानकारी
ऐसी घटनाओं में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जांच का अहम हिस्सा होते हैं। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर विमान की उड़ान से जुड़े कई तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड करता है, जबकि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से कॉकपिट में हुई बातचीत और महत्वपूर्ण ऑडियो संकेतों का विश्लेषण किया जा सकता है।
इन रिकॉर्ड्स को अन्य सबूतों के साथ मिलाकर देखा जाता है। इससे जांचकर्ताओं को घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
विमान के अचानक नीचे आने जैसी घटना में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। टर्बुलेंस या अचानक ऊंचाई में बदलाव के दौरान सीट बेल्ट नहीं पहने यात्रियों को चोट लगने का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि विमानन कंपनियां उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह देती हैं, खासकर जब सीट बेल्ट साइन ऑन हो।
फिलहाल इस घटना को लेकर किसी एक कारण को अंतिम वजह मानना जल्दबाजी होगी। पायलट की मेडिकल जांच, विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, मौसम संबंधी जानकारी और फ्लाइट डेटा समेत सभी पहलुओं के विश्लेषण के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि पायलट के ड्रग टेस्ट की जांच को लेकर सामने आई जानकारी को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। आधिकारिक जांच पूरी होने और सक्षम एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विमान के अचानक 300 फीट नीचे आने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।








