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June 20, 2024 5:32 am

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छात्रों ने जिम्मी मगिलिगन सेंटर आकर “भारत-माता , धरती- माता और गौमाता जय करना सीखा”

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चमेली देवी स्कूल ,इंदौर के छात्र जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट देखने और अनुभव के लिए एक स्टडी टूर पर आये कि जनक पलटा मगिलिगन “पर्यावरण प्रिय सस्टेनेबल जीवन कैसे जीती हैं। सबसे पहला परिचय अपनी देसी गौमाता गौरी से करवाते हुए बताया : ” यह इस आधा एकड़ जैवविव्धता वाले आवासीय फार्म की जननी और पालक है । इस यह धरती माँ रसायनमुक्त है । इस की कृपा से हमें पंचगव्य मिलता है । इसके दिए हुए 6 बछड़े उपहार में भेंट किये ,अलीराजपुर के उन आदिवासी परिवारों की तीन बैलगाडियां चला रहे है जो केवल प्रकृतिक खेती करते आ रहे है और इसकी दी हुई, दो दूध देने वाली गाय अपने 2 -2 बछड़े बछड़ी भी इसी क्षेत्र के उन परिवारों को उपहार दिए जिन्हें जरूरत थी ” ।

इसके बाद छात्रों और शिक्षको का स्वागत अम्बाडी दिखा कर उसके लाभ बताए । फिर एक एक कर पेड़ो से परिचय करवाया ” यह है हमारे अर्जुन , बेल , रुद्राक्ष,रामफल ,सीताफल अश्वगंधा. कठहल , कदम्ब , सोनपत्ती,पारिजात , नीम , खटी इमली , विलायती इमली , क्बीठ , कचनार ,करौंदा, बादाम, अंजीर ,सिन्दूर , शबरी वाले बेर ,शहतूत ,सहजन , आम ,जाम , आवला ,वाटरएप्पल , चीकू पपीता,करंज ,बेशर्म, करंज, नीम्बू , संतरा , मौसमी , सागवान , शीशम ,मोहगनी और अजंन रतनज्योत ,बहुत सारे फ़ल देते है , प्राणवायु , पक्षिओ ,अनेको, जीवजंतुओ के आश्रय है !
कुछ भी बेचने के लिए नही और खरीदने भी नही जाना पड़ता । सोलर कुकर और ड्रायर से साल भर के फलो के शरबत, जैम ,ड्राईफ्रूट ,चटनी ,मुरबे मूंगफली का मकखन आदि स्वस्थ और शुद्ध मिलता है ।

छात्रो ने शुद्ध देसी जैविक अनाज,दाले , सरसों ,गाजर, मटर , शलगम, बथुआ, पालक. चने की भाजी , गोभी मेथी, गिलकी, भिंडी ,बालोर ,गराडू देखी देशी जड़ी बूटियों गिलोय ,हड्डीजोड़, इंसुलिन, वज्रदंती, ग्वारपाठा अरीठा , आँक धतूरा के बाद मसाले मिर्ची ,राई ,मेथीदाना,सौंफ , सूए , अजवयंन ,हल्दी , प्याज लहसुन, टमाटर आलू ,मेथी मीठी नीम ,गर्ममसाला, अम्बाडी तुलसी,मरुआ लेमन-ग्रास देखी । पक्षियों और जानवरों के लिए और स्वच्छ हवा, ये सभी सूरज और हवा के साथ-साथ रासायनिक मुक्त मिट्टी द्वारा संचालित ऊर्जा के प्राकृतिक और नवीकरणीय स्रोतों के साथ जीवन का निर्वाह कर रहे हैं, बिना किसी कचरे को उत्पन्न किए पर्याप्त ऑक्सीजन, भोजन और मन की शांति के स्रोत हैं। वे सभी एक दूसरे पर निर्भर तरीके से एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं । एक तालाब से रेनवाटर हार्वेस्टिंग / वर्षा जल संचयन के संकल्प से जहा आस पडोस में 600 फुट नीचे से पानी खींचते है ,हम 250 फुट से ही सम्पन्न है ।


उन्हें विभिन्न प्रकार के सोलर खाना पकाने, फ़ूड प्रोसेसिंग के उपकरण चलते हुए दिखाए । इसके बाद एक संवादात्मक सत्र हुआ, जब जनक पलटा मगिलिगन ने बताया वे बहाई धर्म की अनुयाई है “ईश्वर का धन्यवाद करने के लिए जीवन के उद्देश्य का पालन करने के लिए प्रयास कर रही हैं क्योंकि हमारी आध्यात्मिक जिम्मेदारी है कि हम अपने स्वयं, अपने परिवार और समुदाय को बनाए रखें और सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दें । पुरे जीवन भर इंदौर में रहते और अपने बहाई पति जिम्मी मगिलिगन के साथ जो भी सीखा है, अनुभव पाया है ” यह मेरे लिए प्रसाद और धन” की तरह हैं, मैं बच्चों. युवा और जो सतत विकास को आगे बढ़ाएंगे ,इच्छुक है उन्हें अपने अनुभव और जो सीखा है, हर पल यथायोगग्य सेवा के माध्यम से “भारत मा की जय ” जीवन जीने की प्रयासरत हूं। छात्रो ने कहा उनके जीवन में यह दुर्लभ पेड़ , प्रजातियो ,प्रकृतिक , कचरामुक्त ,ज़हरमुक्त , शुद्ध जीवन देख कर पहली बार हमने प्रक्टिकल देखा है, कि आप अपने विचारों का पालन कर्म से करती है। आप अपने काम को साझा करने के लिए बहुत उदार हैं। आप के दिखाए पर्यावरण मार्ग पा हम इतने प्रेरित हैं कि हम भी ज़रूर करेंगे !

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

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