अक्सर लोग यह मानकर चलते हैं कि पथरी सिर्फ किडनी में ही होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि लिवर और उससे जुड़ी पित्त प्रणाली में भी पथरी बन सकती है। हालांकि लिवर के अंदर सीधे पथरी बनना अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन गॉलब्लैडर (पित्ताशय) और पित्त नलियों में पथरी बहुत आम समस्या है। गॉलब्लैडर लिवर के ठीक नीचे स्थित होता है, इसलिए इसके लक्षण अक्सर लिवर की समस्या जैसे लगते हैं।
लिवर और पित्त की पथरी कैसे बनती है?
लिवर शरीर में पित्त (बाइल) बनाता है, जो गॉलब्लैडर में जमा रहता है। जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन या कैल्शियम जैसे पदार्थ अधिक मात्रा में जमा हो जाते हैं, तो वे जमकर पथरी का रूप ले लेते हैं। इन्हें गॉलस्टोन या बाइल डक्ट स्टोन कहा जाता है। कभी-कभी पथरी लिवर के अंदर की पित्त नलियों (इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट) में भी बन जाती है, जिसे लिवर स्टोन कहा जाता है।
मोटापा, अनियमित खान-पान, ज्यादा तला-भुना और चिकना खाना, तेजी से वजन घटना, डायबिटीज, और 40 साल से ऊपर की महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
कई लोगों में पथरी बिना किसी लक्षण के सालों तक रह सकती है। लेकिन जब लक्षण शुरू होते हैं, तो इन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, जो अक्सर तला-भुना या चिकना खाना खाने के बाद बढ़ जाता है
- दर्द का पीठ या दाहिने कंधे तक फैलना
- मतली और उल्टी
- अपच, गैस और पेट फूलना
- भूख कम लगना
- त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
- गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल
- बुखार या ठंड लगना (यह संक्रमण का संकेत हो सकता है)
अगर दर्द बहुत तेज हो, बुखार आए या पीलिया के लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं। देरी से पित्त नली में रुकावट, संक्रमण, अग्नाशय की सूजन (पैंक्रियाटाइटिस) या लिवर की गंभीर समस्या हो सकती है।
जांच और इलाज
डॉक्टर आमतौर पर अल्ट्रासाउंड से पथरी की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, एमआरसीपी या ईआरसीपी जैसी जांचें भी करवाई जाती हैं। छोटे स्टोन कभी-कभी दवाओं से नियंत्रित किए जा सकते हैं, लेकिन बड़े या बार-बार समस्या पैदा करने वाले स्टोन के लिए सर्जरी (आमतौर पर लैप्रोस्कोपिक) सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है।
बचाव कैसे करें?
- नियमित और संतुलित आहार लें
- तला-भुना और ज्यादा चिकना खाना कम करें
- वजन धीरे-धीरे कम करें, अचानक डाइटिंग से बचें
- रोजाना शारीरिक गतिविधि करें
- पर्याप्त पानी पिएं
- नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहें
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, मतली या पीलिया जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सही समय पर जांच और इलाज से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।








