प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद प्रोफेसर के. एन. पणिक्कर 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे आधुनिक भारतीय इतिहास के प्रमुख विद्वानों में से एक थे और अपने मार्क्सवादी दृष्टिकोण से इतिहास लेखन के लिए विख्यात थे।
पीटीआई और अन्य समाचार स्रोतों के अनुसार, पणिक्कर का निधन सोमवार (9 मार्च 2026) को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित एक निजी अस्पताल (एसयूटी अस्पताल) में उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण हुआ। वे 26 अप्रैल 1936 को गुरुवायूर में जन्मे थे और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आधुनिक इतिहास के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे, जहां उन्होंने सामाजिक विज्ञान स्कूल के डीन के पद पर भी अपनी सेवाएं दीं।
पणिक्कर को धर्मनिरपेक्षता, वैज्ञानिक इतिहास दृष्टिकोण और सांप्रदायिकता विरोधी विचारधारा के मजबूत पक्षधर के रूप में जाना जाता था। उनकी प्रमुख कृतियों में Against Lord and State: Religion and Peasant Uprisings in Malabar, Culture and Consciousness in Modern India और A Concerned Indian’s Guide to Communalism शामिल हैं। उन्होंने औपनिवेशिक भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक इतिहास पर गहन कार्य किया तथा हिंदुत्व राजनीति के इतिहास में हस्तक्षेप का विरोध किया।
उनके निधन पर कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम पार्टी के संस्थापक कमल हासन ने फेसबुक पर लिखा: “भारत के सबसे सम्मानित इतिहासकारों और सार्वजनिक बुद्धिजीवियों में से एक प्रोफेसर के. एन. पणिक्कर के निधन से गहरा दुख हुआ है। आधुनिक भारतीय इतिहास के प्रतिष्ठित विद्वान के रूप में उन्होंने अपने कठोर अकादमिक काम को धर्मनिरपेक्षता और ऐतिहासिक सत्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता के साथ आजीवन जोड़े रखा। उनका निधन एक युग के अंत जैसा है।”
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर शोक जताते हुए कहा: “उन्होंने साहस और तर्क के साथ धर्मनिरपेक्षता और हमारे अतीत के ईमानदार अध्ययन का बचाव किया।”
पणिक्कर की पत्नी उषा पणिक्कर का पहले निधन हो चुका है। वे अपनी दो बेटियों रागिनी और शालिनी के पीछे गए हैं। उनका निधन भारतीय इतिहास लेखन और सेकुलर विचारधारा के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। उनके योगदान से प्रभावित पीढ़ियां उन्हें सदैव याद रखेंगी।






