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May 25, 2024 2:05 pm

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Rajasthan News: भाभी से गैंगरेप, ननद से ब्लैकमेलिंग और पुलिस का खेल… दिल झकझोर देगी रेप पीड़िता की आपबीती

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साल 2017 में एक फिल्म आई थी ‘काबिल’. इस फिल्म के हीरो और हिरोईन यानी ऋतिक रोशन और यामी गौतम का किरदार नेत्रहीन था. फिल्म में एक कॉर्पोरेटर का बेटा यामी के किरदार का रेप करता है. ऋतिक और यामी थाने जाकर रिपोर्ट लिखाते हैं. लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती. इसके बाद हौसला बढ़ता है तो कॉर्पोरेटर का बेटा दोबारा यामी के घर में घुस कर उसका रेप करता है. अब कानून और सिस्टम से हार चुकी यामी की किरदार खुदकुशी कर लेती है.

फिल्म की ये कहानी दिल झकझोर देने वाली है. लेकिन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ के राजियासर थाना इलाके के गांव सांवलसर की कहानी रूह को कंपा देना वाली है. यहां गैंगरेप के बाद ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर एक भाभी और ननद ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. करीब तीन महीने पहले भाभी ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि चार दिन पहले मजबूर नंनद ने फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली है. आरोप गांव के तीन लड़कों पर लगा है.

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मृतिका के भाई ने बताया कि गांव के तीन युवक पिछले कुछ समय से उसकी पत्नी को परेशान कर रहे थे. उन्होंने उसकी पत्नी का अश्लील वीडियो बना लिया था, जिसे वायरल करने की धमकी देकर लगातार उसके साथ गैंगरेप कर रहे थे. इसके बाद उन्होंने पत्नी से उसकी ननद से भी बात करवाने के लिए कहा था. मजबूर होकर उसने ननद से बात करा दी. उन लोगों ने उसे भी भाभी की इज्जत का वास्ता देकर अपने पास बुलाया और अपनी हवस का शिकार बनाया.

इस तरह तीनों युवक उन दोनों महिलाओं का लगातार शारीरिक शोषण करने लगे. इससे तंग आकर भाभी ने एक दिन खुद को आग लगा लिया. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई. ये दिसंबर 2023 की बात है. इस मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई से बचती रही. इधर आरोपियों का मन इतना बढ़ गया कि भाभी की मौत के बाद भी ननद को परेशान करते रहे.

र के लोग थाने पहुंचे. पीड़ित लड़की का बयान दर्ज किया जाने लगा. इस दौरान पुलिस अधिकारी पीड़िता के साथ ऐसे सलूक कर रहे थे, जैसे कि वो खुद आरोपी हो. डीएसपी ऐसे ऐसे सवाल पूछ रहे थेजिसे सुन कर पीड़िता को को लग रहा था जैसे एक बार फिर उसका बलात्कार हो रहा है. पुलिसिया व्यवहार से तंग आकर पीड़िता के परिजन गंगानगर एसपी गौरव यादव के पास पहुंचे.

एसपी को पूरे मामले से अवगत कराया. उनके आदेश के बाद इस मामले की जांच शुरू की गई. लेकिन अंधे कानून के अंधेपन का तमाशा खत्म नहीं होता है. लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था. जाहिर है मेडिकल रिपोर्ट से उसकी सच्चाई सामने आ जाती. लेकिन कानून को अपने हिसाब से नचाने वाले डिप्टी एसपी और उनके बहादुर पुलिस वालों की बेशर्मी देखिए कि मेडिकल टेस्ट के लिए आभा को उसके गांव से श्रीगंगानगर अकेले उस दिन अस्पताल भेजते हैं, जिस दिन अस्पताल में छुट्टी थी. कोई डॉक्टर तक नहीं था. पूरा दिन खराब करके पीड़िता वापस लौट आई. अगले दिन फिर पीड़िता शहर के अस्पताल पहुंची.

वहां उसके साथ ऐसा सलूक होता है जैसे वो खुद रेपिस्ट है. हमाम के नंगेपन का आलम देखिए खाकी के साथ-साथ सफेद कोट वाले डॉक्टर साहब भी वैसे ही कानून का तमाशा बना रहे थे, जैसे खाकी वाले बड़े बाबू उन्हें बताते जा रहे थे. पीड़िता पढ़ी लिखी थी. उसने निर्भया की कहानी भी सुन रखी थी. उसे लगता था कि अब देश बदल चुका है. पुलिस वाले किसी बलात्कारी को नहीं छोड़ेंगे. इसलिए वो तमाम दुश्वारियों के बावजूद गुनहगारों को सजा दिलाना चाहती थी.

पीड़िता की लड़ाई के आगे कानून को झुकना पड़ा. तीन में से दो गुनहगारों के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज कर पुलिस ने उन्हें जेल भी भेज दिया. लेकिन तीसरे और सबसे ताकतवर गुनहगार की लड़ाई अब भी जारी थी. तीसरा गुनहगार कोई मामूली गुनहगार नहीं है. राज्य के एक मंत्री का रिश्तेदार है. लिहाजा पुलिस ने अपना पूरा फर्ज निभाते हुए उसे इस केस से दूर कर दिया. पीड़िता उसे भी सजा दिलाने के लिए लड़ती रही. लेकिन इसमें कोई उसका साथ नहीं दे रहा था.

उल्टे उसकी वजह से घर और घर के लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही थी. इस बात का अहसास अब पीड़िता को भी होने लगा था. लिहाजा तीन अप्रैल को उसने एक आखिरी फैसला लिया. वो अपनी आखिरी बात मीडिया के जरिए देश तक पहुंचाना चाहती थी. इसीलिए उसने तीन अप्रैल की सुबह कुल चार रिपोर्टर को फोन किया. उनको अपनी पूरी कहानी सुना दी. इसके बाद उसी दिन रात करीब 12 घंटे के बाद अपने घर में फांसी के फंदे पर झूल गई.

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फांसी पर झूलने से पहले उसने अपनी कलाई भी काट ली थी. वो खुद के जिंदा बच जाने की कोई भी गुंजाइश छोड़ना ही नहीं चाहती थी. शायद वो अंधे बहरे और गूंगे कानून के उकता चुकी थी. उसे यकीन हो चला था कि जो इंसाफ उसे जीते जी नहीं मिल रहा शायद उसकी मौत उसे वो इंसाफ दिला दे. बस यूं समझ लीजिए कि उसकी कहानी फिल्म ‘काबिल’ से कुछ अलग नहीं है. फर्क इतना है कि फिल्म में हीरो और हिरोईन अंधे बने थे, यहां कानून अंधा था.

इसी अंधे कानून की वजह से दो लोगों को खुदकुशी करनी पड़ी. जी हां, ननद से पहले उसकी भाभी को भी जब कानून और पुलिस से उसके सुलगते सवालों के जवाब नहीं मिले, तो वो खुद ही जिंदा आग में जल उठी. ये कहानी सिर्फ दो मौत की कहानी नहीं है, बल्कि ये खाकी, खादी, कानून, इंसाफ, सिस्टम हरेक के मुंह पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ है. तो चलिए जीते जी पीड़िता की जिस कहानी को उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद कोई नहीं सुन पाया, उसे सुनते हैं.

गैंगरेप पीड़िता की जुबानी, दिल झकझोर देने वाली कहानी
इस कहानी की शुरुआत साल भर पहले होती है. पीड़ित भाभी कॉलेज में पढ़ रही थी. घर से कॉलेज वो बस से जाया करती थी. उसी बस में तीन और लड़के अपने कॉलेज जाया करते थे. इन लड़कों के नाम हैं अशोक, लालचंद और श्योचंद. इनमें से श्योचंद राजस्थान के कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का रिश्तेदार है. बस में आते जाते तीनों लड़कों से पीड़िता की दोस्ती हो जाती है. एक रोज़ मौका मिलते ही तीनों उसके साथ जबरदस्ती करते हैं.

इस दौरान मोबाइल से उसका अश्लील वीडियो बना लेते हैं. ताकि वो पुलिस या घरवालों से इस बारे में कुछ ना कहे. इसके बाद तीनों ने इसी धमकी के साथ उसको छोड़ देते हैं. दो बच्चों की मां इस हादसे डर गई. उसे लगा कि यदि उसका वीडियो उसके गांव और ससुरालवालों तक पहुंच गया, तो उसकी शादीशुदा जिंदगी खत्म हो जाएगी. लिहाजा वो खामोश हो गई. इसके बाद उसको नोचने खसोटने का ये सिलसिला महीनों तक बदस्तूर चलता रहा.

भाभी की लूटते रहे इज्जत, ननद पर थी आरोपियों की नजर
इज्जत की खातिर पीड़ित अब तक खामोश थी. लेकिन फिर अचानक एक रोज वही तीनों लड़के उसको धमकी देते हैं कि अब वो अपनी ननद से उन्हें मिलाए. उससे फोन पर बात कराए. वरना वीडियो लीक कर देंगे. वो अपना घर टूटने के डर से ननद को सारी बात बता देती है. अब दोनों पूरी तरह से उन तीनों लड़कों के चंगुल में फंस चुकी थी. ननद नहीं चाहती थी कि उसकी भाभी की जिंदगी खराब हो. पर उसे पता नहीं था कि अब खुद उसकी जिंदगी अजाब हो चुकी है.

ये सिलसिला भी महीनों चलता रहा. घर की इज्जत की खातिर दोनों अब तक खामोश थी. लेकिन फिर तभी 23 दिसंबर 2023 को जब ननद-भाभी घर लौट रही थी, तब रास्ते में तीनों लड़के फिर से टकरा जाते हैं. इस बार तीनों पहली बार एक साथ दोनों की आबरू लूटते हैं. लुटती हुई आबरू के बीच भाभी अपने सामने अपनी ननद को भी लुटती देख रही थी. उससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ. इसके बाद उसी शाम उसने खुद पर पेट्रोल डाल कर खुद को जिंदा जला लिया.

ननद की अस्मत लुटते देख खुद को आग के किया हवाले
हालांकि उसकी सास और कुछ लोगों की उस पर नजर पड़ गई और उन्होंने फौरन आग बुझा दी. लेकिन तब तक वो 80 फीसदी झुलस चुकी थी. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया. लेकिन फिर दो महीने बाद 23 फरवरी उसने दम तोड़ दिया. इस बीच भाभी के झुलसने के बाद उसके घरवालों ने बिना सच्चाई जाने उसके ससुरालवालों पर ही उसे जला डालने का आरोप लगाया. इस पर पुलिस ने उसके पति और ननद समेत पूरे घरवालों पर मुकदमा दर्ज कर लिया.

लेकिन मरने से ऐन पहले खुद भाभी ने पूरे गांव वालों के सामने ये बयान दिया कि उसका पति, ननद और ससुराल के लोग बेकसूर हैं. उसने खुद को आग इज्जत की खातिर लगाई थी. उसकी मौत के बाद अब ननद ने भी हिम्मत जुटाई और घरवालों को सारी कहानी बता दी. उसके बाद ननद उन तीन लड़कों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने गई. यहीं से अंधे कानून की अंधी कहानी की शुरुआत होती है. पहले तो पुलिस उस पर दबाव डालती है.

जेहन से जाने का नाम ही नहीं ले रहा ये अहम सवाल?
पुलिस कहती है कि वो एक या दो लड़के का ही नाम ले, तीनों का नहीं. खास कर उस लड़के का तो बिल्कुल नहीं, जो राज्य के मंत्री का रिश्तेदार है. लेकिन उसकी मौत के बाद उनकी सच्चाई लोगों तक पहुंच जाती है. उका नजरिया ही बदल जाता है. अब वही लोग उसकी लड़ाई को अपनी लड़ाई बना कर पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतर आए. पुलिस को भी अहसास था कि दोनों मौत का असली जिम्मेदार उन तीनों के अलावा खुद पुलिस भी है.

लिहाजा, अब खुद पुलिस के पास भी अपने बेशर्म चेहरे को छुपाने का कोई रास्ता नहीं बचा था. मजबूरन उन्हें उस तीसरे गुनहगार को भी गिरफ्तार करना ही पड़ा. जी हां, ननद की मौत के ठीक 24 घंटे बाद उस तीसरे गुनहगार को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है, जिसे वो अब तक खुद ही भगाती और बचाती रही थी. पता नहीं ये सवाल पूछना चाहिए कि नहीं. मालूम भी नहीं है कि ये सवाल अच्छा है या बुरा है. पर जेहन से ये सवाल जाने का नाम ही नहीं ले रहा है. सवाल ये कि यदि ननद ने अपनी जान न दी होती, तो क्या ये तीसरा गुनहगार पकड़ा जाता? क्या ननद-भाभी को इंसाफ मिल पाता?

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

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