अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO बनाए जाने पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़े कामों की जिम्मेदारी मंदिर और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के पास होनी चाहिए।
पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को हुई अहम बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला CEO नियुक्त किया। यह नियुक्ति मंदिर की बढ़ती प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी जरूरतों के बीच की गई है।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब चार दशक के सैन्य करियर के बाद वह अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त हुए थे।
इमरान मसूद ने नियुक्ति पर उठाए सवाल
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मंदिर का काम मंदिर से जुड़े लोगों और साधु-संतों के हिसाब से होना चाहिए।
मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के पीछे धार्मिक व्यवस्था के बजाय दूसरे हित देखे जा रहे हैं। उन्होंने RSS पर भी निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
‘जो जहाज उड़ाते हैं, उन्हें मंदिर का CEO बनाया गया’
इमरान मसूद ने अपने बयान में जितेंद्र मिश्रा की सैन्य पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पहले हवाई जहाज उड़ाने और सैन्य जिम्मेदारियां संभालने से जुड़े रहे हैं, उन्हें अब मंदिर की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।
मसूद का तर्क है कि राम मंदिर आस्था का विषय है और इसके कामकाज में धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों की भूमिका अहम होनी चाहिए। उन्होंने इसी आधार पर CEO की नियुक्ति पर सवाल उठाए।
जितेंद्र मिश्रा का लंबा सैन्य करियर
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का करियर रहा है। वह फाइटर पायलट और टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।
अब सैन्य सेवा से अलग भूमिका में वह राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बने हैं। ट्रस्ट की ओर से CEO की नियुक्ति को मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं के बीच लिया गया फैसला
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या, परिसर की व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे विषयों को देखते हुए ट्रस्ट के स्तर पर एक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी।
इसी पृष्ठभूमि में CEO की नियुक्ति की गई है। इस पद पर जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी धार्मिक अनुष्ठानों को संचालित करना नहीं, बल्कि ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़े कामों को व्यवस्थित करना महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
नियुक्ति के साथ तीन नए ट्रस्टी भी बनाए गए
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में CEO की नियुक्ति के अलावा तीन नए ट्रस्टियों के नामों का भी ऐलान किया गया। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव शामिल हैं।
निर्मला यादव की नियुक्ति को भी खास माना जा रहा है, क्योंकि वह ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बनी हैं। इससे ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिला है।
नियुक्ति पर सियासत जारी
राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे पर CEO की नियुक्ति के बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया ने इस फैसले को सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस की ओर से इमरान मसूद ने नियुक्ति के तरीके और पद की जरूरत को लेकर सवाल उठाए हैं।
वहीं, नियुक्ति के समर्थकों का तर्क है कि मंदिर परिसर की विशाल प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने के लिए अनुभवी और अनुशासित प्रशासनिक नेतृत्व की आवश्यकता है। ऐसे में रिटायर्ड एयर मार्शल जैसे वरिष्ठ अधिकारी का अनुभव प्रबंधन के लिहाज से उपयोगी हो सकता है।
अब आगे क्या होगा?
जितेंद्र मिश्रा के सामने राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CEO के रूप में उनकी भूमिका किस तरह तय की जाती है और मंदिर परिसर की बढ़ती व्यवस्थाओं में इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल, नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। इमरान मसूद के बयान ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।








