बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव में मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को पीछे छोड़ दिया है। पहले राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर करीब 862 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
यह उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह प्रशांत किशोर का पहला प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबला है। वर्षों तक देश की कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब अपनी पार्टी जन सुराज के बैनर तले जनता के बीच चुनावी मैदान में उतरे हैं। ऐसे में बांकीपुर का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है। पार्टी ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकी है, जबकि प्रशांत किशोर ने इसे अपनी राजनीतिक शुरुआत का सबसे बड़ा मंच बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्थानीय मुद्दों, शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार और बेहतर प्रशासन को प्रमुखता से उठाया। दूसरी ओर बीजेपी ने संगठन की मजबूती और अपने पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे चुनाव लड़ा।
मतगणना सोमवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर की बढ़त ने समर्थकों में उत्साह भर दिया है। हालांकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि अभी कई राउंड की गिनती बाकी है और अंतिम नतीजे आने तक तस्वीर बदल भी सकती है। इसलिए शुरुआती बढ़त को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता।
इस चुनाव से पहले मतदान के दिन भी विवाद देखने को मिला था। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था कि उनके समर्थकों को पुलिस द्वारा परेशान किया गया और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष मतदान का दावा किया था। इन विवादों के कारण भी यह उपचुनाव राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर अपनी शुरुआती बढ़त को जीत में बदलने में सफल रहते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे जन सुराज पार्टी को नई पहचान मिलेगी और आगामी चुनावों में राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। वहीं यदि बीजेपी यह सीट बचाने में सफल रहती है, तो वह अपने पारंपरिक गढ़ पर पकड़ कायम रखने का संदेश देगी। फिलहाल सभी की निगाहें मतगणना के अगले राउंड और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं।








