नई दिल्ली: हृदय रोग आज केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान, धूम्रपान, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं के कारण कम उम्र के लोगों में भी दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर हार्ट चेकअप कराने से कई गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी का पारिवारिक इतिहास नहीं है और वह पूरी तरह स्वस्थ है, तो 20–30 वर्ष की उम्र से नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) की जांच कराते रहना चाहिए। वहीं 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप के साथ हृदय संबंधी जांच को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या हृदय रोग रहा है, या फिर व्यक्ति धूम्रपान करता है, मोटापे का शिकार है या लंबे समय से तनाव में रहता है, तो उसे सामान्य लोगों की तुलना में पहले और अधिक नियमित हार्ट चेकअप कराने की आवश्यकता हो सकती है।
हार्ट की जांच के लिए डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण और जोखिम के आधार पर अलग-अलग टेस्ट की सलाह देते हैं। इनमें ईसीजी (ECG), ईकोकार्डियोग्राफी (Echo), ट्रेडमिल टेस्ट (TMT), लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी या अन्य उन्नत जांच शामिल हो सकती हैं। सभी लोगों के लिए हर टेस्ट जरूरी नहीं होता, इसलिए जांच हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीने में दर्द, सांस फूलना, तेज धड़कन, अत्यधिक थकान, चक्कर आना या व्यायाम के दौरान असामान्य परेशानी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर उचित जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट चेकअप पर थोड़ी सी जागरूकता भविष्य में होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी जांच या उपचार का निर्णय अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम कारकों के अनुसार योग्य डॉक्टर की सलाह से ही लें।








