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January 15, 2026 3:59 pm

कठघरे में ममता बनर्जी का ‘हल्‍ला बोल’, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर बंगाल चुनाव की राजनीति तक

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  • 8 जनवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में I-PAC (टीएमसी की चुनावी रणनीति बनाने वाली पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म) के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की। यह छापा कोयला घोटाले (कोल स्कैम) से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा था।
  • ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं (पुलिस के साथ), और ED का दावा है कि उन्होंने जांच में बाधा डाली, सबूत (डॉक्यूमेंट्स, डिवाइस) अपने साथ ले गईं, यहां तक कि एक ED अधिकारी का फोन भी छीन लिया। ED ने 17 गंभीर आरोप लगाए, जैसे डकैती, लूट, सबूत नष्ट करना।
  • कलकत्ता हाई कोर्ट: TMC की याचिका खारिज कर दी गई, क्योंकि ED ने कहा कि उसने कुछ जब्त नहीं किया—सब कुछ ममता और उनकी टीम ने ले लिया। सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टाली गई।
  • सुप्रीम कोर्ट: ED ने याचिका दाखिल की, FIR दर्ज करने और पुलिस अधिकारियों (DGP राजीव कुमार, कोलकाता कमिश्नर) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 15 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई, जहां ED ने CBI जांच की मांग की। ममता की तरफ से कैविएट दाखिल था, और उनके वकीलों (कपिल सिब्बल आदि) ने दलीलें दीं कि छापा चुनाव से पहले राजनीतिक बदले की भावना से था, और संवेदनशील चुनावी डेटा को निशाना बनाया गया।
  • विपक्ष का हमला: शुभेंदु अधिकारी ने ममता पर मानहानि का नोटिस भेजा (कोयला घोटाले में अमित शाह से जोड़ने के लिए), और कहा कि अदालत में मिलेंगे।

लेख का मुख्य तर्क:

ममता बनर्जी की “सड़क + अदालत” वाली रणनीति अब तक काम करती रही, लेकिन इस बार वे खुद घिर गई हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया तो वे खुद को “पीड़ित” बताकर अप्रैल 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में फायदा उठा सकती हैं। लेकिन अगर फैसला खिलाफ हुआ (FIR दर्ज हुई) तो सरकार पर संकट आ सकता है, और यह चुनाव का बड़ा मुद्दा बनेगा। लेख इसे “हल्ला बोल” कहता है, लेकिन स्थिति कमजोर दिख रही है।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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