नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने रविवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर अघोषित इमरजेंसी थोपने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी नेता सोमवार शाम भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलेंगे। वे राजधानी में एक दिन पहले युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन पर की गई कार्रवाई को लेकर अपनी चिंताएं उनके सामने रखेंगे।
खडग़े ने कहा, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने पूरे देश में अफरातफरी का माहौल बना दिया है। अघोषित इमरजेंसी जैसी स्थिति है और हम इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे।
खडग़े ने जिस विरोध प्रदर्शन का जिक्र किया, वह शनिवार को हुआ था। उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बडिय़ों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन किया था। राजधानी को किले में बदल दिया गया था; सेंट्रल दिल्ली को सील कर दिया गया, कई जगहों पर मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया और सडक़ों पर हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को हिरासत में लिया गया। इनके साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एम.ए. बेबी और सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य को भी हिरासत में लिया गया।
खडग़े ने कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती का पैमाना ही सब कुछ बयां करता है। उन्होंने कहा, कल लगभग 32,000 पुलिसकर्मी और 7,500 सीआरपीएफ जवान तैनात किए गए थे। इससे पता चलता है कि सरकार युवाओं के आंदोलन से कितना डरी हुई है। इन आंकड़ों को जोडऩे पर पता चलता है कि एक ही दिन में कुल 39,500 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। लगभग 2,500 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिसका मतलब है कि तैनात किए गए हर 16 सुरक्षाकर्मियों पर लगभग एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। खडग़े ने शहर में आम जिन्दगी पर लगी पाबंदियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, जैसा कि मैंने पहले ही कहा है, सडक़ें बंद कर दी गई थीं, बातचीत के रास्ते बाधित कर दिए गए थे, एयरपोर्ट तक पहुँचने पर रोक लगा दी गई थी और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए गए थे। यह सब दिखाता है कि सरकार नहीं चाहती कि भारत में लोकतंत्र शांति से काम करे।
रविवार को, एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दीपके और सीजेपी के दो अन्य नेताओं को इस शर्त पर रिहा कर दिया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। पार्टी ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया था, लेकिन शहर में भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण लोगों की मौजूदगी कम रही।
इस माहौल में, खडग़े और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, दोनों ने सीजेआई को पत्र लिखा है और विपक्ष ने सोमवार को शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच का समय माँगा है। उन्होंने कहा, हम उनसे कुछ माँग नहीं सकते, लेकिन हम हाथ जोडक़र अपनी चिंताएँ उनके सामने रखेंगे और उनसे दखल देने का अनुरोध करेंगे।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद गुंडागर्दी पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को महिलाओं और युवाओं पर हमला करने के लिए उकसाया जा रहा है। गांधी ने कहा कि दमन की हर कार्रवाई के साथ जेन जेड और छात्रों में गुस्सा और बढ़ेगा। उन्होंने शाह को चुनौती दी कि वे सडक़ों पर 10,000, 20,000 या 40,000 पुलिसकर्मी उतारें—यह संख्या शनिवार के लिए खडग़े द्वारा बताए गए 39,500 कर्मियों के आंकड़े के करीब है।
गांधी ने कहा, हम डरने वाले नहीं हैं। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है! उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस, पूरा इंडी गठबंधन और देश के युवा सोमवार को फिर से सडक़ों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि सीजेआई के साथ बैठक एक सीधा संदेश देगी। सोमवार को हम चीफ जस्टिस से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सडक़ों पर संविधान के टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हों और लोकतंत्र को कुचला जा रहा हो, तो कानून के रखवाले आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते।
खडग़े ने कहा, चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है। यह एक स्वतंत्र संस्था है और इसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, इसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंदरूनी लोगों ने पहले ही खतरे की घंटी बजा दी है।चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने खुलकर बताया है कि आयोग कैसे काम कर रहा है, उसमें किस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, और आयोग के सदस्य खुद इस स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं। इसके बावजूद, इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उनका सबसे तीखा हमला मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े 2023 के कानून पर था। इस कानून ने चयन पैनल से सीजेआई को हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया और चुनाव अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों के लिए कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान की। खरगे ने कहा, यह सुरक्षा देने के बाद, वोट चोरी, ईवीएम में हेरफेर और चुनावी धोखाधड़ी की पूरी प्रक्रिया शुरू हो गई। सीईसी चाहे कितनी भी गलतियाँ करे, उन्हें उन गलतियों के लिए जवाबदेही से आजीवन छूट दी गई है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहले ही वोट चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया है। रविवार को आई रिपोर्टों में की गई इन टिप्पणियों पर केंद्र और भाजपा ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सोमवार की बैठक अब न्यायपालिका को बढ़ते राजनीतिक टकराव के केंद्र में ले आएगी। एक ही दिन में, बंगाल, दिल्ली, केरल, त्रिपुरा और वामपंथी दलों के नेताओं को राजधानी की सडक़ों पर हिरासत में लिया गया, जिससे विपक्ष को एक साझा मुद्दा मिल गया जिसे वे आने वाले हफ्ते में भी उठाएंगे।
खडग़े ने स्पष्ट किया कि बैठक का नतीजा चाहे जो भी हो, कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, हम लोकतंत्र और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।








