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February 22, 2024 3:45 pm

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Gyanvapi Case: बाहरी ही नहीं, बनारस की नई पीढ़ी के लिए भी ‘तिलिस्‍म’ है व्‍यास तहखाना

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धर्म नगरी काशी के ज्ञानवापी परिसर स्थित जिस व्‍यास तहखाने को हिंदू समाज आदि विश्‍वेश्‍वर का मंदिर मानता है, उसमें 30 साल बाद विधिवत पूजा-पाठ की तस्‍वीरें और विडियो सोशल मीडिया के जरिए देश के कोने-कोने तक पहुंचा है। बनारस घूमने या फिर बाबा विश्‍वनाथ का दर्शन करने आने वाले ही नहीं, बनारस की नई पीढ़ी भी व्‍यास तहखाना देखने को उत्‍सुक हैं। नई पीढ़ी ने अब तक बाबा विश्‍वनाथ का दर्शन तो किया, लेकिन तहखाना नहीं देखा था।

शुक्रवार को काशी विश्‍वनाथ धाम पहुंचने वाले हर श्रद्धालु में व्‍यास तहखाने तक पहुंचने और वहां रखे विग्रहों के दर्शन की उत्‍सुकता दिखी। बाबा दरबार में हाजिरी लगाने वाले करीब एक लाख श्रद्धालुओं की निगाहें तहखाने को खोजती रहीं। पुजारियों-जवानों से रास्‍ता पता चलने पर सभी के कदम ज्ञानवापी कूप के पास स्थित बड़े नंदी जी की ओर बढ़ चले। नंदी के कान में ‘मन्‍नत’ कहने के बाद बाहर से ही तहखाने का दर्शन करने की खुशी देखते ही बनी। इनमें काफी संख्‍या में बनारस के युवा भी रहे। चौक और मैदागिन इलाके के रहने वाले युवा रमेश, शंकर, गणेश अभिषेक और उनके साथियों का कहना था कि बनारस में पैदा तो हुए लेकिन इससे पहले कभी व्‍यास तहखाना नहीं देखा था। जिस ज्ञानवापी मस्जिद के भूतल पर व्‍यास तहखाना स्थित है, वहां जुमे की नमाज में उमड़ी भारी भीड़ के कारण कुछ समय के लिए तहखाने के दर्शन पर रोक रही। इन सबके के बीच सबसे अच्‍छी बात यह है कि बना-रस का ‘रस’ बना हुआ है। यानी सबकुछ पहले की तरह ही कायम है।

वाराणसी की जिला कोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशासन की ओर से बुधवार मध्‍यरात्रि बाद लोहे की बैरेकेडिंग हटाकर व्‍यास तहखाना में पूजा-पाठ की व्‍यवस्‍था कराई गई है। व्‍यास तहखाने में एक नहीं, बल्कि पांच विग्रहों को प्रतिष्‍ठापित किया गया है। इनमें हनुमान जी, श्री हरि विष्‍णु, शिवलिंग, माता गंगा की सवारी घड़ियाल और प्रथम पूज्‍य भगवान गणेश की मूर्ति शामिल है। ये वही मूर्तियां है जो भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (एएसआई) को सर्वे के दौरान तहखाने में मिलने पर कोषागार में जमा करवा दी गई थीं। कोषागार में रखी आठ मूर्तियां मंगवाई गई, लेकिन तीन मूर्तियों को तहखाने में अलग रखा गया है। मुख्‍य स्‍थान पर पांच प्रतिमाओं का ही पूजन हो रहा है। इस बीच तहखाने में श्रीरामचरितमानस का पाठ भी आरंभ हो गया है। अनवरत पाठ के लिए छह पुजारियों की तैनाती की गई है। तहखाने में प्रवेश के लिए काशी विश्‍वनाथ धाम स्थित बड़े नंदीजी की प्रतिमा के सामने लगभग सात फुट ऊंचा गेट लगाया गया है।

तहखाने का नया नाम ज्ञान तालगृह

पूजन-दर्शन आरंभ होने के बाद काशी विद्वत परिषद ने व्‍यास तहखाने को नया नाम दिया है। परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि तहखाना नाम उचित नहीं है। शास्‍त्रोक्‍त नाम ज्ञान तालगृह के नाम से इसे जाना जाएगा। अखिल भारतीय संत समिति ने भी नए नाम पर मुहर लगाई है। समिति के महामंत्री स्‍वामी जितेंद्रानंद सरस्‍वती का कहना है कि तहखाने का नामकरण हो गया है। बाबा सबको मुक्ति देते हैं। लोहे के कठघरे को जल्‍द हटाया जाएगा।

पूजा का अधिकार मंदिर को सौंपा

व्‍यास तहखाना मामले के वादी शैलेंद्र कुमार व्‍यास ने पूजा करने का अधिकारी विश्‍वनाथ मंदिर प्रशासन को सौंप दिया है। उन्‍होंने विश्‍वनाथ मंदिर न्‍यास के नाम पर लिखित सहमति पत्र दिया है। इसी के आधार पर मंदिर प्रशासन ने तहखाने में पूजन की जिम्‍मेदारी संभाली है। विश्‍वनाथ मंदिर प्रशासन के मुताबिक अभी तो मंदिर के ही अर्चक तहखाने में पूजन करेंगे। जरूरत पड़ी तो तहखाने के लिए नियमित पुजारियों की नियुक्ति की जाएगी। बता दें कि व्‍यास परिवार 473 साल से ज्ञानवापी में पूजा पाठ करता आ रहा है। ज्ञानवापी में कभी व्‍यास पीठ रही, जिसकी महत्ता का उल्‍लेख शास्‍त्रों में भी मिलता है।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

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