नई दिल्ली/जयपुर, 10 मार्च 2026: देश में एलपीजी (कुकिंग गैस) का संकट तेजी से गहरा गया है। मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो गई है। इससे भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलो) की सप्लाई पर कई राज्यों में अघोषित रोक लग गई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठानों को गैस नहीं मिल पा रही है।
तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने डीलर्स को संदेश भेजकर कमर्शियल सिलेंडर की नई बुकिंग और सप्लाई फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। कई जगहों पर कंपनियों के पास सिर्फ 2-3 दिनों का स्टॉक बचा है। घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) पर भी कोटा घटाकर 20-25% कर दिया गया है और बुकिंग के बाद डिलीवरी में 2 से 8 दिनों तक का इंतजार लग रहा है। नए नियम के तहत अब 25 दिनों बाद ही नया सिलेंडर बुक किया जा सकता है।
रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता और प्रतिक्रिया जयपुर के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया, “महंगी कीमत पर भी कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं है। हमारी रसोई ठप होने की कगार पर है। शादी-विवाह के सीजन में यह संकट हजारों लोगों को प्रभावित कर रहा है।” मुंबई और पुणे में रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 2-3 दिनों में सप्लाई नहीं बहाल हुई तो 20% से ज्यादा होटल-रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं। बेंगलुरु और कोलकाता में भी यही हालात हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, अन्यथा ‘कैटास्ट्रोफिक क्लोजर्स’ (बड़ी संख्या में बंद) की आशंका जताई है।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल एलपीजी पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन स्टॉक बचाने के लिए प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को दी जा रही है। सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है ताकि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकी जा सके। शनिवार को घरेलू सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से आयात बाधित है। स्थिति सुधरने में समय लग सकता है। इस बीच, होटल-रेस्टोरेंट कारोबारी वैकल्पिक ईंधन (जैसे PNG या बिजली) की तलाश में हैं, लेकिन अधिकांश के पास कोई विकल्प नहीं है।
यह संकट न केवल हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी महंगाई और असुविधा का सबब बन रहा है। सरकार ने रिफाइनरियों से उत्पादन बढ़ाने और आयात को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।






