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February 7, 2026 5:49 am

Trump Must Go’ से ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ तक… अमेरिका और ईरान जल रहे एक जैसी आग में!

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ईरान वर्तमान में गंभीर विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है, जो दिसंबर 2025 के अंत से शुरू होकर जनवरी 2026 में पूरे देश में फैल चुके हैं। यह आंदोलन शुरू में आर्थिक संकट, महंगाई, रियाल की भारी गिरावट और बिजली-पानी की कटौती से उपजा था, लेकिन अब यह खुलकर इस्लामी गणराज्य के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ क्रांति की मांग में बदल चुका है।

मुख्य घटनाक्रम और स्थिति:

  • प्रदर्शन कहाँ-कहाँ? तेहरान समेत सभी 31 प्रांतों में फैले हुए हैं। हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं, नारे लग रहे हैं जैसे “खामेनेई मुर्दाबाद”, “मौत दीکتेटर को”, “मुल्ला देश छोड़ो”, “इस साल सैयद अली (खामेनेई) को उखाड़ फेंकेंगे”।
  • हिंसा और मौतें: मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRANA) के अनुसार, अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है (490+ प्रदर्शनकारी और 48+ सुरक्षा बल के जवान)। कुछ रिपोर्ट्स में 2,000 तक मौतों का अनुमान है, खासकर इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान। हजारों घायल और 10,000+ गिरफ्तार। सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, पेलेट गन और बल प्रयोग किया है। अस्पताल ओवरलोड हैं, कई जगह शवों के ढेर की खबरें।
  • सरकार की प्रतिक्रिया: खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “वंडल्स”, “सबोटर्स” और अमेरिका-इज़राइल के एजेंट बताया है। इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल पूरी तरह बंद, क्रैकडाउन तेज। सरकारी मीडिया में समर्थन रैलियां दिखाई जा रही हैं, लेकिन असंतोष बढ़ता जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय कोण: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी प्रदर्शनकारियों को एकजुट रहने और शहरों पर कब्जा करने की अपील की है। कुछ जगहों पर लायन एंड सन फ्लैग (पुरानी राजशाही का प्रतीक) लहराया जा रहा है।

क्या यह पूरी क्रांति है?

यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का सबसे बड़ा और व्यापक आंदोलन लग रहा है। लोग शासन परिवर्तन, लोकतंत्र या राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं। लेकिन इंटरनेट बंदी और कठोर दमन के कारण सटीक तस्वीर मिलना मुश्किल है। स्थिति बहुत नाजुक है—शासन कमजोर दिख रहा है, लेकिन IRGC और सुरक्षा बल अभी वफादार हैं। अगर दमन जारी रहा तो और खूनखराबा हो सकता है, या अगर बड़े पैमाने पर विद्रोह हुआ तो बदलाव संभव।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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