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October 14, 2026 1:51 pm

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जोड़ों में अचानक दर्द और सूजन को न करें नजरअंदाज, गाउट बीमारी का बढ़ रहा खतरा; जानें बचाव के उपाय

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दुनियाभर में गाउट (Gout) के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान बढ़ रहा है। गाउट गठिया का एक प्रकार है, जिसमें शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने और उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने से अचानक तेज दर्द, सूजन और लालिमा हो सकती है। यह समस्या अक्सर पैर के अंगूठे के जोड़ में दिखाई देती है, लेकिन घुटनों, टखनों और हाथों के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है। कई बार दर्द अचानक शुरू होता है और इतना तेज होता है कि चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है।

गाउट का खतरा पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक देखा जाता है। हालांकि, महिलाओं को भी यह बीमारी हो सकती है, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद। उम्र, आनुवंशिक कारण, किडनी की कार्यक्षमता, कुछ दवाएं, खानपान और जीवनशैली इसके जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या है गाउट और क्यों होता है?

गाउट एक प्रकार का सूजन वाला गठिया है। शरीर में प्यूरीन नामक पदार्थ के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। प्यूरीन शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है और कुछ खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है। सामान्य परिस्थितियों में किडनी यूरिक एसिड को छानकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।

जब शरीर में यूरिक एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाती, तो इसका स्तर बढ़ सकता है। कुछ लोगों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने लगते हैं, जिससे तेज दर्द और सूजन का दौरा पड़ सकता है। हालांकि, केवल यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा होना गाउट की पुष्टि नहीं करता। इसके लिए डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर अन्य जांचों का सहारा लेते हैं।

गाउट के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

गाउट के लक्षण अक्सर अचानक सामने आते हैं। कई लोगों में रात के समय दर्द का दौरा शुरू हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • अचानक तेज दर्द: पैर के अंगूठे, टखने या घुटने के जोड़ में अचानक तेज दर्द होना।
  • सूजन और लालिमा: प्रभावित जोड़ के आसपास सूजन, लालिमा और गर्माहट महसूस होना।
  • छूने पर दर्द: जोड़ इतना संवेदनशील हो सकता है कि हल्का स्पर्श भी असहज लगे।
  • चलने-फिरने में परेशानी: दर्द के कारण प्रभावित पैर पर वजन डालना या जोड़ को हिलाना मुश्किल हो सकता है।
  • बार-बार दर्द के दौरे: बीमारी नियंत्रित न होने पर दर्द और सूजन दोबारा हो सकते हैं।

यदि किसी जोड़ में पहली बार अचानक तेज दर्द और सूजन हो, तो खुद से इसे गाउट मानकर इलाज शुरू न करें। जोड़ में संक्रमण जैसी दूसरी गंभीर स्थितियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

पुरुषों में गाउट का खतरा ज्यादा क्यों होता है?

गाउट पुरुषों में अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है। इसका एक कारण हार्मोनल अंतर है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन यूरिक एसिड को किडनी के जरिए बाहर निकालने में मदद कर सकता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में भी गाउट का जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा, शराब का अधिक सेवन, शक्कर वाले पेय, लाल मांस और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन, मोटापा तथा किडनी की बीमारी जोखिम बढ़ा सकते हैं। कुछ दवाएं, विशेषकर पेशाब बढ़ाने वाली कुछ दवाएं, यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, हर मरीज में गाउट होने की वजह एक जैसी नहीं होती।

गाउट की पहचान कैसे करते हैं डॉक्टर?

गाउट की पहचान के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षणों, दर्द की जगह, सूजन और पहले हुए ऐसे दौरों के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार जांच कराई जा सकती है।

  • यूरिक एसिड टेस्ट: खून में यूरिक एसिड का स्तर मापा जाता है। हालांकि, दर्द के दौरे के दौरान इसका स्तर सामान्य भी हो सकता है।
  • जोड़ के तरल पदार्थ की जांच: जरूरत पड़ने पर प्रभावित जोड़ से तरल पदार्थ का नमूना लेकर उसमें यूरिक एसिड के क्रिस्टल की जांच की जाती है।
  • इमेजिंग जांच: कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड या अन्य जांचों से जोड़ में क्रिस्टल जमा होने के संकेत देखे जा सकते हैं।

सिर्फ यूरिक एसिड की रिपोर्ट के आधार पर बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। जांच का निर्णय डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार लेते हैं।

गाउट से बचाव के लिए क्या करें?

गाउट का जोखिम कम करने और बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं।

  • पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में पानी की कमी से बचाता है। यदि डॉक्टर ने किसी बीमारी के कारण तरल पदार्थ सीमित रखने को कहा है, तो उनकी सलाह का पालन करें।
  • संतुलित आहार अपनाएं: फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों को आहार में शामिल करें।
  • कुछ खाद्य पदार्थ सीमित करें: कलेजी जैसे अंगों के मांस, लाल मांस और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन गाउट का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • शराब और मीठे पेय कम करें: शराब और अधिक शक्कर वाले पेय यूरिक एसिड के स्तर तथा गाउट के दौरों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • स्वस्थ दिनचर्या रखें: नियमित शारीरिक गतिविधि करें और वजन में बदलाव धीरे-धीरे लाएं। बहुत तेजी से वजन घटाने या लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।
  • दवाएं डॉक्टर की सलाह से लें: यूरिक एसिड कम करने वाली दवाएं कुछ मरीजों के लिए जरूरी होती हैं। इन्हें खुद से शुरू या बंद न करें।

गाउट का इलाज कैसे होता है?

गाउट के अचानक होने वाले दर्द और सूजन को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं दे सकते हैं। जिन लोगों को बार-बार दौरे पड़ते हैं या जोड़ों को नुकसान होने का खतरा रहता है, उन्हें यूरिक एसिड नियंत्रित रखने के लिए लंबे समय तक दवा की जरूरत हो सकती है। नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना महत्वपूर्ण है।

यदि जोड़ में अचानक तेज दर्द, लालिमा और सूजन के साथ बुखार भी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। यह किसी गंभीर संक्रमण का संकेत भी हो सकता है, जिसके लिए जल्द उपचार जरूरी है।

निष्कर्ष

गाउट एक ऐसी बीमारी है जिसे सही पहचान, उचित इलाज और जीवनशैली में बदलाव की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। जोड़ों में अचानक दर्द और सूजन को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने और सही जांच कराने से बीमारी की पहचान करने तथा जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसे डॉक्टर की जांच या व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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