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March 26, 2026 12:04 pm

डिजिटल जागरूकता से साइबर ठगी पर लगाम: 55,000 करोड़ की चोरी, लेकिन सरकार की सख्ती बढ़ी

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 डिजिटल लेन-देन की तेज रफ्तार के साथ साइबर ठगी भी तेजी से बढ़ रही है। हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहा है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच साइबर अपराधियों ने लोगों के खातों से 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उड़ाई है। पिछले पांच वर्षों में कुल 6 करोड़ 58 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए सभी विभागों, बैंकों और एजेंसियों को संयुक्त रूप से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और बैंकिंग संस्थानों को मिलकर एक समन्वित तथा अत्यधिक सुरक्षित प्रणाली विकसित करने को कहा है, ताकि नई तकनीकों का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

साइबर ठगी के बढ़ते आंकड़े

गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार:

  • 2021: ठगी की राशि — 551 करोड़, शिकायतें — 2,62,846
  • 2022: ठगी की राशि — 2,290 करोड़, शिकायतें — 6,94,446
  • 2023: ठगी की राशि — 7,465 करोड़, शिकायतें — 13,10,357
  • 2024: ठगी की राशि — 22,848 करोड़, शिकायतें — 19,18,835
  • 2025: ठगी की राशि — 22,495 करोड़, शिकायतें — 24,02,579

ये आंकड़े डिजिटल सुरक्षा के सामने खड़ी व्यापक चुनौती को उजागर करते हैं। हालांकि सरकार की सक्रियता से राहत भी मिल रही है। I4C के माध्यम से 2021-2025 के बीच 8,189 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अपराधियों से बचाई जा चुकी है।

सरकार के प्रमुख कदम

  • CBI में नई साइबर अपराध शाखा की स्थापना।
  • I4C के तहत राज्य स्तर पर साइबर अपराध समन्वय केंद्रों का विस्तार।
  • सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) का क्रियान्वयन।
  • टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in)।
  • जनवरी 2020 से नवंबर 2025 तक पोर्टल पर 23 करोड़ से अधिक विजिट्स दर्ज हुए और 82 लाख शिकायतों में से लगभग 1.84 लाख मामलों को FIR में बदला गया।
  • राज्यों को फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। असम सहित कई राज्यों में आधुनिक साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित हैं।

राजस्थान में चिंताजनक स्थिति: भरतपुर नया ‘जामताड़ा’

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के बाद राजस्थान भी साइबर अपराध के प्रमुख राज्यों में शामिल है। झारखंड के जामताड़ा और बिहार के कुछ इलाकों की तरह अब राजस्थान का भरतपुर जिला साइबर ठगी का बड़ा केंद्र बन गया है। भरतपुर, अलवर और मथुरा क्षेत्र मिलकर देश के साइबर अपराध का बड़ा हिस्सा प्रभावित कर रहे हैं।

2025 में राजस्थान में 786 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी दर्ज की गई। पुलिस ने 2.5 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक किए। अपराधियों की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैली हुई हैं, जिसमें कंबोडिया जैसे देशों से ट्रेनिंग लेकर भारत में काम करने वाले गिरोह शामिल हैं।

साइबर ठगों की नई चालें

ठग रोज नई ट्रिक्स अपना रहे हैं:

  • फेक इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग स्कैम
  • AI आधारित सोशल इंजीनियरिंग
  • डिजिटल अरेस्ट (ऑनलाइन गिरफ्तारी का भय दिखाकर ठगी)
  • टेलीग्राम स्कैम
  • फर्जी क्रेडिट कार्ड, वाहन चालान, शादी कार्ड
  • फर्जी बिजली बिल और LPG डिलीवरी स्कैम

पढ़े-लिखे और समझदार व्यक्ति भी इन जाल में फंस रहे हैं।

साइबर विशेषज्ञ उमा पेंड्याला की सलाह

साइबर सुरक्षा कंपनी SecurEyes की बिजनेस ऑपरेशंस हेड उमा पेंड्याला कहती हैं कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। बचाव के लिए उन्होंने ये महत्वपूर्ण टिप्स दिए:

  • मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करें तथा उन्हें समय-समय पर बदलते रहें।
  • किसी भी ईमेल, SMS या सोशल मीडिया लिंक पर बिना सोचे क्लिक न करें।
  • बैंक या सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाले फोन कॉल पर सतर्क रहें। संवेदनशील जानकारी कभी शेयर न करें।
  • मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर एंटीवायरस सॉफ्टवेयर रखें तथा सिस्टम को नियमित अपडेट करें।
  • लुभावने ऑफर, लॉटरी या निवेश स्कीम के नाम पर आने वाले कॉल/मैसेज से बचें।
  • अगर कोई खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर ऑनलाइन गिरफ्तारी की धमकी दे, तो घबराएं नहीं। आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें।
  • ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

डिजिटल क्रांति ने अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन जोखिम भी कई गुना बढ़ गए हैं। जन-जागरूकता, सतर्कता और सरकार के प्रयासों का संयोजन ही साइबर ठगी पर प्रभावी लगाम लगा सकता है। हर नागरिक को अपनी डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी समझनी होगी।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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