नई दिल्ली। दिवाली के त्योहारी सीजन से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आबोहवा लगातार चिंताजनक बनी हुई है। गुरुवार को दिल्ली में लगातार चौथे दिन हवा की गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। मौसम और पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो दिवाली से पहले शुक्रवार से वायु गुणवत्ता में और अधिक गिरावट आने की आशंका है, जिससे इसके ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने की पूरी संभावना बनी हुई है।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा गुरुवार शाम 4 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 369 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले बुधवार को इसी समय यह आंकड़ा 377 दर्ज किया गया था, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी के बेहद करीब है। इससे पहले शहर का औसतन एक्यूआई मंगलवार को 350 और सोमवार को 324 दर्ज किया गया था। शहर में काम कर रहे कुल एक्टिव एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 18 स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता पहले ही ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की जा चुकी है। दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में स्थिति सबसे खतरनाक रही, जहां शाम 4 बजे एक्यूआई का स्तर सबसे ज्यादा 454 तक पहुंच गया।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के तय मानकों के अनुसार, एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम ने पूर्वानुमान जारी करते हुए चेतावनी दी है कि दिल्ली में गुरुवार को वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में ही बनी रहेगी, लेकिन शुक्रवार से रविवार के बीच स्थिति में और अधिक गिरावट आएगी तथा इसके ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है। बुलेटिन में यह भी बताया गया है कि आगामी 6 दिनों तक राजधानी की एयर क्वालिटी ‘गंभीर’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी के बीच ही झूलती रहने की संभावना है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारणों का विश्लेषण करने वाले ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 नवंबर को शहर की आबोहवा खराब करने में पराली का धुआं नहीं बल्कि वाहनों से निकलने वाला जहरीला उत्सर्जन सबसे बड़ा जिम्मेदार कारक बनेगा। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ ने बुधवार को प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 20.2 प्रतिशत और वाहनों के धुएं का योगदान 15.5 प्रतिशत आंका था। गुरुवार को पराली का योगदान 15.601 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसके शुक्रवार को बढ़कर 19.201 प्रतिशत होने और फिर शनिवार को भारी गिरावट के साथ घटकर 1.575 प्रतिशत तक आने का अनुमान जताया गया है।








