नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में नाबालिग छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त 2026 की है। आरोप है कि ग्रेटर नोएडा के परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान बस चालक और कंडक्टर ने नाबालिग के साथ अपराध किया। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और बस को भी कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।
बारिश के बीच परी चौक पर मिली बस
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता 11वीं कक्षा की छात्रा है और उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली है। बताया गया कि वह अपने घर से निकलकर नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह रास्ते में परी चौक पर उतर गई।
इसी दौरान एक खाली स्लीपर बस वहां से गुजरी। आरोप है कि छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 तक छोड़ने की बात कहकर बस में बैठा लिया। उस समय बस में कोई अन्य यात्री मौजूद नहीं था।
47 किलोमीटर के सफर में सामने आया गंभीर अपराध
पुलिस के अनुसार, बस परी चौक से कश्मीरी गेट की तरफ बढ़ी और इसी दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। रिपोर्टों में बताया गया है कि बस की खिड़कियों पर गहरे रंग के पर्दे लगे थे, जिससे बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई देना मुश्किल था।
आरोप है कि कश्मीरी गेट पहुंचने के बाद पीड़िता को देर रात बस से उतार दिया गया। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों की मदद से आरोपियों की पहचान की।
ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार
जांच के बाद पुलिस ने बस चालक और कंडक्टर को तिमारपुर इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस ने कथित वारदात में इस्तेमाल बस को भी कब्जे में ले लिया है और उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बना रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के आधार पर की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बस ने करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस दौरान किसी प्रभावी पुलिस जांच या रोक का सामना नहीं किया।
बसों में ड्राइवर-कंडक्टर का पुलिस सत्यापन, यूनिफॉर्म और नेम प्लेट, सीसीटीवी, पैनिक बटन तथा वाहन की निगरानी जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संबंधित सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ।
पर्दों को लेकर भी सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, बस में ऐसे पर्दे लगे थे जिनसे अंदर का हिस्सा बाहर से स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता था। सार्वजनिक परिवहन वाहनों में दृश्यता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन को लेकर इस घटना के बाद चर्चा तेज हो गई है।
यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर बस में कोई आपात स्थिति थी, तो चालक या वाहन की निगरानी करने वाली व्यवस्था से तत्काल जानकारी क्यों नहीं मिली। इन सभी पहलुओं की जांच अब पुलिस कर रही है।
परिवार को दी गई जानकारी
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पीड़िता के परिजनों से संपर्क किया। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने छात्रा को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया है। मामले में पीड़िता की पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक न करना कानूनी और नैतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था की होगी पड़ताल
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले की जांच जारी है। पुलिस बस की फॉरेंसिक जांच के साथ-साथ घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाल रही है।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामले के तौर पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में नाबालिगों और अन्य यात्रियों की सुरक्षा, वाहन निगरानी और सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी कोई भी निजी जानकारी सार्वजनिक करना कानून और उसकी निजता के खिलाफ हो सकता है। इसलिए खबर में उसकी पहचान से संबंधित विवरण जानबूझकर शामिल नहीं किए गए हैं।








