जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में रितु बराला केस को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मामले में जीरो-FIR दर्ज करने से इनकार किए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की गई और मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई गई। करीब 40 घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं से मिले। इस दौरान कमिश्नरेट के बाहर भी प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही।
जीरो-FIR दर्ज कराने की मांग पर कांग्रेस का धरना
रितु बराला केस में जीरो-FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। कांग्रेस का कहना है कि मामले में शिकायत के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कमिश्नरेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन से मामले में स्पष्ट जवाब देने और शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। मामला बढ़ने के साथ ही यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।
40 घंटे बाद पुलिस कमिश्नर ने की मुलाकात
कमिश्नरेट में धरना दे रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने करीब 40 घंटे बाद मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें रखीं और मामले में कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिकायत के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
कमिश्नर से मुलाकात के बावजूद जीरो-FIR को लेकर विवाद चर्चा में बना रहा। कमिश्नरेट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन और नारेबाजी के जरिए अपना विरोध जताया। इस पूरे घटनाक्रम के चलते पुलिस प्रशासन और कांग्रेस के बीच तनातनी की स्थिति देखने को मिली।
जीरो-FIR को लेकर क्या है विवाद?
जीरो-FIR ऐसी प्राथमिकी होती है, जिसे घटना के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने पर भी किसी पुलिस थाने में दर्ज किया जा सकता है। बाद में संबंधित मामले को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए उचित क्षेत्राधिकार वाले थाने में भेजा जा सकता है। इसका उद्देश्य शिकायतकर्ता को केवल क्षेत्राधिकार के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने से वंचित होने से बचाना है।
रितु बराला मामले में विवाद इसी बात को लेकर है कि जयपुर में अलग से जीरो-FIR दर्ज की जाए या पहले से दर्ज मामले के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाए। कांग्रेस इस मामले में जीरो-FIR दर्ज करने की मांग कर रही है, जबकि पुलिस का पक्ष है कि संबंधित घटनाक्रम के संबंध में पहले ही मामला दर्ज है और उसकी जांच की जा रही है।
राजनीतिक रूप से भी अहम बना मामला
रितु बराला केस को लेकर जयपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन ने पुलिस की कार्रवाई और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता मामले में उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन का रुख पहले से दर्ज मामले और उसकी जांच से जुड़ा है।
फिलहाल, इस पूरे विवाद में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और जांच से सामने आने वाले तथ्यों को देखना महत्वपूर्ण होगा।








