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May 30, 2024 2:40 am

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लालसोट नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड गिरने के कगार पर, अविश्वास प्रस्ताव हो सकता है पारित

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दौसा । लालसोट नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड ढहने के कगार पर है। यदि कोई कानूनी अड़चन नहीं आई तो लालसोट पालिका अध्यक्ष रक्षा मिश्रा के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के स्पष्ट आसार नजर आ रहे हैं।

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा और समर्थित पार्षदों ने पालिका अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। जिस पर 12 जनवरी को मतदान होगा। पालिका अध्यक्ष के खिलाफ लामबंद खेमे में 30 पार्षद होने का दावा किया गया है। ऐसे में 35 सदस्यीय नगर पालिका का कांग्रेसी बोर्ड ढहना तय है। इसमें खास बात यह है कि कांग्रेसी खेमे में सेंध लगना भी पूरी तरह तय माना जा रहा है।

अविश्वास की मुहिम को भी कांग्रेस के कुछ नेता ही हवा दे रहे हैं। हालांकि विरोधी पार्षदों का नेतृत्व भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक रामविलास मीणा कर रहे हैं। विधायक के नेतृत्व में ही पार्षदों ने अविश्वास के लिए कलेक्टर को नोटिस दिया था। पालिका अध्यक्ष के खिलाफ बीजेपी, निर्दलीय व कांग्रेस के पार्षद लामबंद हैं, जिन्हें 14 दिनों से कैंपिंग में रखा गया है। बताया जाता है कि पार्षदों को गुजरात ले जाया गया था, जहां से श्रीनाथजी भी रखा गया। अब विरोधी 30 पार्षद जयपुर पहुंच गए हैं, जो 12 जनवरी को सुबह लालसोट आकर मतदान करेंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 के दिसंबर माह में हुए नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा के 13-13 पार्षद एवं 9 वार्डों में निर्दलीय को जीत मिली थी। कांग्रेस की रक्षा मिश्रा आठ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेकर नगरपालिका चेयरमैन पद पर काबिज हुईं थीं। इधर, पालिकाध्यक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन प्रस्तुत किया है। जिसमें कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव की सूचना उन्हें समाचार पत्रों से पता चली है।

पार्षदों द्वारा दिए गए नोटिस एवं उसमें उल्लेखित आरोपों के संबंध में जानकारी मांगी थी। लेकिन, आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। साथ ही अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में 12 जनवरी को बुलाई गई बैठक की कोई सूचना अधिकृत रूप से तामील नहीं कराई गई है। ऐसे में अविश्वास की बैठक में अध्यक्ष अपना पक्ष सदन के समक्ष स्पष्ट नहीं कर सकेंगी।

बैठक में यदि उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना बैठक में निर्णय पारित किया जाता है तो यह विधि के विपरीत एवं मनमानी होगी। कलेक्टर ने विधि शाखा से दस्तावेज उपलब्ध कराने अथवा नहीं कराने के संबंध में राय मांगी थी। इस पर विधि शाखा द्वारा डीएलबी निदेशालय को प्रकरण भेज रखा है। पालिकाध्यक्ष ने न्यायहित में बैठक निरस्त कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देने की मांग की है।

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