
हे दिव्यवाणी के पुत्र ! अपना मुखड़ा मेरी ओर कर और मेरे अतिरिक्त अ सभी कुछ त्याग दे, क्योंकि मुझ महान की सत्ता शाश्वत उसका



आज का पवित्र लेख: बहाई लेखो से :-


“हे दुनिया के लोगों ! सत्यत: तुम जानो कि एक आदृश्य विपत्ति तुम्हारा पीछा कर रही है और घोर यातना तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

है बांधवो! परस्पर सहनशील रहो और हीन वस्तुओं में अनुराग न रखो। अपनी समृद्धि का अहंकार न करो और अनादर में लज्जित न हो। मेरे

हे बांधवो ! परस्पर सहनशील रहो और हीन वस्तुओं में अनुराग न रखो। अपनी समृद्धि का अहंकार न करो और अनादर में लज्जित न हो।

हे धूल की संतानो ! धनिकों को निर्धन की अर्द्धरात्रि की आहों से परिचित कराओ, कहीं प्रमाद उन्हें विनाश के मार्ग पर न पहुंचा दे

हे अस्तित्व के पुत्र ! यदि दरिद्रता तुझे ग्रस्त कर ले तो दुःखी न हो, क्योंकि यथासमय वैभव का स्वामी तुझ तक पदार्पण करेगा। दुर्भाग
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