महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंढा स्थित एक सरकारी स्कूल में बच्चों के भोजन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत स्कूल का दौरा किया और दावा किया कि विद्यार्थियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे भोजन संबंधी कुछ पैकेट फरवरी 2026 में ही एक्सपायर हो चुके थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एक्सपायर मसालों के पैकेट दिखाकर उठाए सवाल
निरीक्षण के दौरान दिपके ने मीडिया के सामने कुछ मसालों के पैकेट दिखाए। उनका दावा था कि इन पैकेटों की एक्सपायरी फरवरी में हो चुकी थी, जबकि अब सितंबर शुरू होने वाला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये पैकेट वास्तव में एक्सपायर हो चुके हैं तो इन्हें बच्चों के भोजन की तैयारी में इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।
दिपके ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग अपने बच्चों को भी ऐसा भोजन देना स्वीकार करेंगे।
स्कूल की दूसरी व्यवस्थाओं पर भी सवाल
दिपके ने सिर्फ भोजन की गुणवत्ता का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल किए। उनके मुताबिक, स्कूल में लगा पानी का फिल्टर काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण बच्चों को बोरवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्होंने स्कूल के बाथरूम में पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने संबंधित क्षेत्र के अधिकारी से फोन पर बातचीत कर इन समस्याओं को सामने रखा और व्यवस्था सुधारने की मांग की।
87 छात्रों के लिए सिर्फ दो कमरे होने का दावा
दिपके ने स्कूल की इमारत और कक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि स्कूल में 87 विद्यार्थियों के लिए केवल दो कमरे उपलब्ध हैं, जबकि चार कक्षाओं को मंजूरी मिली हुई है। इससे ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की स्थिति पर बहस तेज हो गई है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत निरीक्षण
अभिजीत दिपके ग्रामीण सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत वे स्कूलों में शिक्षा, पानी, शौचालय, कक्षाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि एक्सपायर्ड भोजन के इस्तेमाल का दावा फिलहाल दिपके के निरीक्षण और उनके बयानों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से पैकेटों की जांच और आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर उठे इस सवाल ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।








