नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अभिजीत दीपके और सौरभ दास की फंडिंग को लेकर इन दिनों चर्चा तेज है। संगठन की गतिविधियों, देशभर में होने वाले कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों पर खर्च होने वाले पैसों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच अभिजीत दीपके ने फंडिंग को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर सबूत सामने रखने की चुनौती भी दी है।
फंडिंग को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
दरअसल, CJP के नेता अलग-अलग शहरों में कार्यक्रम और विरोध प्रदर्शन करते नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन गतिविधियों के लिए पैसा कहां से आता है और संगठन के खर्च कौन उठा रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी CJP के नेताओं की फंडिंग पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि देश में हो रहे कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक मदद मिल रही है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनके समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई निर्णायक आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अभिजीत दीपके ने क्या दिया जवाब?
फंडिंग को लेकर लगाए गए आरोपों पर अभिजीत दीपके ने हरीश साल्वे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास विदेशी फंडिंग से जुड़े सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए।
दीपके का कहना है कि अब तक सरकार यह साबित नहीं कर पाई है कि उनके संगठन को विदेश से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने आरोपों को सबूतों के साथ सामने रखने की बात कही।
सौरभ दास ने फंडिंग पर क्या बताया?
वहीं, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने एक डिबेट के दौरान संगठन की फंडिंग को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संगठन को आम लोगों से आर्थिक सहयोग मिलता है।
दास के मुताबिक, अलग-अलग शहरों में लोग अपनी क्षमता के अनुसार मदद करते हैं। कोई यात्रा के लिए फ्लाइट टिकट उपलब्ध कराता है तो कोई कार्यक्रम के लिए हॉल की बुकिंग करा देता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बीजेपी समर्थक भी संगठन को आर्थिक सहयोग देते हैं।
फंडिंग का पूरा हिसाब अब भी चर्चा का विषय
CJP की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच संगठन के नेताओं के बयान सामने आए हैं, लेकिन कुल कितनी रकम जुटाई गई, किसने कितना योगदान दिया और अब तक कितना खर्च हुआ, इसका विस्तृत प्रमाणित हिसाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में संगठन की फंडिंग का पूरा ब्योरा सामने आना इस विवाद को समझने के लिहाज से अहम होगा। फिलहाल विदेशी फंडिंग के आरोप और संगठन की ओर से दिए गए जवाबों के बीच यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।








