मुंबई: बैंकिंग जगत में एक बड़े कानूनी विवाद ने सबका ध्यान खींचा है। NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज के संस्थापक बीआर शेट्टी (BR Shetty) ने बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य पक्षों के खिलाफ करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.43 लाख करोड़ के हर्जाने का दावा किया है। यह मामला बैंकिंग लेनदेन, कथित धोखाधड़ी और वित्तीय जिम्मेदारी से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है।
हालांकि, यह रकम अदालत द्वारा तय किया गया जुर्माना या बैंक की साबित हो चुकी देनदारी नहीं है, बल्कि बीआर शेट्टी की ओर से मांगा गया हर्जाना है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
कौन हैं बीआर शेट्टी?
बीआर शेट्टी भारतीय मूल के कारोबारी हैं, जिन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में NMC हेल्थकेयर और UAE एक्सचेंज जैसे बड़े कारोबार खड़े किए। NMC हेल्थकेयर कभी UAE के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा समूहों में शामिल था। बाद में कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई और उसके वित्तीय लेनदेन तथा कर्ज को लेकर विवाद सामने आए।
बैंक ऑफ बड़ौदा पर क्या हैं आरोप?
बीआर शेट्टी की ओर से दायर कानूनी मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य पक्षों पर कथित वित्तीय अनियमितताओं, गलत तरीके से लेनदेन संभालने और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। शेट्टी का दावा है कि इन घटनाओं के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और कारोबारी प्रतिष्ठा को नुकसान उठाना पड़ा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद में कथित तौर पर ऋण गारंटी, हस्ताक्षर, वित्तीय दस्तावेजों और NMC से जुड़े लेनदेन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है।
₹1.43 लाख करोड़ के दावे का पूरा गणित
बीआर शेट्टी ने अपने मुकदमे में कुल 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है। यह दावा तीन हिस्सों में बांटा गया है।
| हर्जाने का प्रकार | दावा की गई राशि |
|---|---|
| प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान | 5 अरब डॉलर |
| कारोबार और अवसरों का नुकसान | 5 अरब डॉलर |
| प्रतिष्ठा को नुकसान | 5 अरब डॉलर |
| कुल | 15 अरब डॉलर |
शेट्टी का आरोप है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और बैंक की कार्रवाई के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कारोबारी प्रतिष्ठा को भी भारी चोट पहुंची।
बैंक ऑफ बड़ौदा का क्या है जवाब?
बैंक ऑफ बड़ौदा ने पहले कहा था कि उसे मुकदमे की औपचारिक कॉपी नहीं मिली थी और अदालत में लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने हितों की रक्षा करेगा।
बैंक का कहना है कि वह बीआर शेट्टी के खिलाफ भारत और UAE में करीब ₹2,800 करोड़ की बकाया राशि की वसूली के लिए अलग कानूनी कार्रवाई भी कर रहा है।
NMC हेल्थकेयर विवाद से कैसे जुड़ा है मामला?
यह विवाद NMC हेल्थकेयर समूह के वित्तीय संकट से जुड़ा है। वर्ष 2020 में NMC हेल्थकेयर प्रशासनिक प्रक्रिया में चला गया था। कंपनी के वित्तीय लेनदेन, कर्ज और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर कई आरोप सामने आए।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने NMC के प्रशासकों से जुड़े एक अलग विवाद में करीब 600 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹5,700 करोड़ का समझौता भी किया था। हालांकि, बैंक ने इस समझौते को अपनी गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के रूप में नहीं बताया।
5 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में क्या हुआ?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 5 नवंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को बीआर शेट्टी के मुकदमे में नोटिस जारी किया। शेट्टी की ओर से बैंक के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए तत्काल राहत की मांग की गई थी। अदालत ने मामले को 19 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
शेट्टी ने अदालत से बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, ईमेल, बैंकिंग सिस्टम और संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। उनका कहना है कि ये रिकॉर्ड मामले की जांच और आरोपों को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और दोनों पक्षों के जवाब अहम होंगे। बीआर शेट्टी के आरोपों की न्यायिक जांच होगी, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा अपनी कानूनी स्थिति पेश करेगा।
फिलहाल ₹1.43 लाख करोड़ का आंकड़ा एक कानूनी दावा है, अंतिम फैसला नहीं। अदालत में आरोप साबित होने और हर्जाने की जिम्मेदारी तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस विवाद का वित्तीय असर कितना बड़ा हो सकता है।








