देशभर में इस वर्ष दीपावली का महापर्व 8 नवंबर को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत ठीक दो दिन पहले यानी 6 नवंबर को धनतेरस के पावन पर्व के साथ होगी। पांच दिनों तक चलने वाले इस दीपोत्सव के पहले दिन मनाए जाने वाले धनतेरस के इस पर्व को सुख, समृद्धि और नई खरीदारी के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस अवसर पर लोग परंपरा के अनुसार सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों के साथ-साथ नए बर्तनों की खरीदारी करते हैं और अपने घरों में सुख-शांति की कामना करते हैं। इसके अलावा, धन के देवता भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शुभ वस्तुओं की घर में स्थापना से जीवन में खुशहाली और स्थायी समृद्धि का आगमन होता है।
पंचांग की गणना के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर होगा। धनतेरस के इस पावन अवसर पर प्रदोष काल के दौरान की जाने वाली पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवती लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से लेकर रात्रि 7 बजकर 57 मिनट तक निर्धारित किया गया है, जबकि प्रदोष काल का कुल समय शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात्रि 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस के दिन बहुमूल्य धातु के रूप में सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, और इसके लिए खरीदारी का मुुहूर्त 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 7 नवंबर की सुबह 6 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। सनातन परंपरा में सोने को वैभव, संपन्नता और आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाता है, जिस कारण लोग इस दिन स्वर्ण आभूषण या सोने के सिक्के खरीदना विशेष रूप से पसंद करते हैं। ऐसी गहरी लोक मान्यता है कि धनतेरस पर सोने की घर में वापसी से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है और परिवार में ऐश्वर्य की कभी कमी नहीं होती है।
सोने के साथ-साथ इस पर्व पर चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। चांदी को शुद्धता, शीतलता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए लोग इस दिन चांदी के सिक्के, आभूषण और अन्य सामग्रियां खरीदते हैं, जिनका उपयोग बाद में दीपावली के पूजन में भी किया जाता है। इसी प्रकार, अपनी आर्थिक क्षमता और पारिवारिक आवश्यकताओं के अनुसार पीतल, तांबे या स्टील के नए बर्तन खरीदने का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन घर में नए बर्तनों का प्रवेश होना घर-परिवार में अन्न-धन के भंडारे भरने और निरंतर प्रगति का सूचक होता है।
इस विशेष अवसर पर केवल धातुएं ही नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों तथा उनके चरणों की खरीदारी का भी अत्यधिक महत्व है। मां लक्ष्मी को जहां धन और भौतिक सुख-सुविधाओं की अधिष्ठात्री देवी माना गया है, वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और किसी भी नए कार्य की विघ्नमुक्त शुरुआत का कारक माना जाता है। कई परिवार इन सुंदर मूर्तियों को अपने घर के देवालय में स्थापित कर दीपावली की रात उनकी विशेष पूजा करते हैं। इसके अतिरिक्त, माता लक्ष्मी के चांदी या अन्य धातुओं से बने चरण घर के मुख्य द्वार पर या पूजा स्थल के पास स्थापित किए जाते हैं, जिन्हें देवी के अलौकिक आगमन और घर में बरकत का प्रतीक माना जाता है।








